नईदुनिया डिजिटल डेस्क, जबलपुर। योग और संगीत दोनों ही मन और शरीर को संतुलित रखने के प्रभावी माध्यम माने जाते हैं। जब इन दोनों का समन्वय होता है तो स्वास्थ्य लाभ कई गुना बढ़ जाता है। स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के बीच संगीत और योग का अनूठा संयोजन लोगों को आकर्षित कर रहा है।
मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संदेश भी दे रहे हैं
मधुर संगीत की धुनों के बीच योगाभ्यास कराते योग प्रशिक्षक शिल्पी न केवल लोगों को शारीरिक रूप से स्वस्थ बना रहे हैं, बल्कि मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संदेश भी दे रहे हैं। इस पहल की शुरुआत अपने घर से कुछ लोगों के साथ की थी।
विभिन्न वर्ग के लोग प्राप्त कर रहे हैं स्वास्थ्य लाभ
नियमित अभ्यास और इसके सकारात्मक परिणामों को देखकर लोगों की संख्या बढ़ती गई। उनके सत्रों में विभिन्न आयु वर्ग के लोग शामिल होकर स्वास्थ्य लाभ प्राप्त कर रहे हैं।
योग करना अधिक आनंददायक और प्रभावी महसूस होता है
संगीतमय योग की विशेषता यह है कि इसमें योगासन, प्राणायाम और ध्यान को मधुर संगीत के साथ कराया जाता है। इससे साधकों का मन अधिक एकाग्र रहता है और तनाव, चिंता तथा मानसिक थकान में कमी आती है। इस पद्धति से योग करना अधिक आनंददायक और प्रभावी महसूस होता है।
अब एक अभियान का रूप ले चुकी है पहल
स्वस्थ समाज का निर्माण तभी संभव है जब लोग अपने दैनिक जीवन में योग और सकारात्मक जीवनशैली को अपनाएं। उनकी यह पहल अब एक अभियान का रूप ले चुकी है, जिसमें हर दिन नए लोग जुड़ रहे हैं। संगीत और योग के इस अनूठे मेल ने न केवल लोगों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाया है, बल्कि सामुदायिक स्तर पर स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
योग से आसान हुई जिंदगी, 50 हजार लोगों को मिली राहत
शहडोल जिला आयुष विभाग के प्रयास से जिले में योग जन-जन तक पहुंचा है। कोरोना काल से शुरू हुई इस पहल से सैकड़ों लोगों की जिंदगी आसान हुई है और कई को बीमारियों से छुटकारा मिला है। जिला आयुष विभाग के दस हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों में नियमित योग कराया जा रहा है। यहां सात योगाचार्य लोगों को योग से जोड़ रहे हैं। निजी संस्थाएं भी आनलाइन और आफलाइन योग करा रही हैं।
करीब 500 लोग ऐसे तैयार हुए हैं जो खुद नियमित योग करते हैं
पिछले पांच साल में जिले के डेढ़ लाख लोगों तक योग पहुंचा है। इनमें से 50 हजार लोगों की दिनचर्या आसान हुई है और कई बीमारियों से राहत मिली है। करीब 500 लोग ऐसे तैयार हुए हैं जो खुद नियमित योग करते हैं और अवसर मिलने पर दूसरों को भी योग से जोड़ते हैं। जिला आयुर्वेद अस्पताल में नियुक्त योगाचार्य शिवाकांत शुक्ला और उनकी टीम नियमित योग करा रहे हैं, जिसका लाभ लोगों को मिल रहा है।
जिला आयुष अधिकारी डा. शशिप्रभा पांडेय ने बताया कि योग को जन-जन तक पहुंचाने के नियमित प्रयास हो रहे हैं। डेढ़ लाख से अधिक लोगों तक योग पहुंच चुका है और सैकड़ों लोग इसे दिनचर्या में शामिल कर स्वस्थ हैं। इसकी लगातार मानिटरिंग की जाती है।
पीपल के पेड़ नीचे रोज करवा रहे योगाभ्यास
बालाघाट जिले की बिरसा तहसील के करौंदा बहेरा गांव में एक शिक्षक ने योग को अपनी दिनचर्या में शामिल कर लिया है। वे रोज युवा से लेकर बुजुर्गों को भी योग करवा रहे हैं। योग गांव में 200 वर्ष पुराने पीपल के पेड़ के नीचे करवाते हैं। ये सिलसिला पांच वर्ष से चल रहा है।
कोरोना काल में हुई मौतों ने झकझोरा
वर्ष 2021 में करौंदा बहेरा में दो लोगों की मौत हो गई थी। सहायक शिक्षक जनकलाल चौधरी ने और अन्य कोई व्यक्ति को मौत न हो, इसके लिए कोरोना काल में पीपल के पेड़ के नीचे रोज सुबह एक से डेढ़ घंटे योग करवाना शुरू किया। जो वर्षाकाल से लेकर हर दिन नियमित बना हुआ है। योग करने गांव के युवा से लेकर बुजुर्ग भी आते हैं। योग करने से सभी लोग निरोग रहते हैं।
योग शिक्षक जनकलाल चौधरी ने कई लोगों की दिनचर्या बदल दी है। रोज योग में सूर्य नमस्कार, लोम, अनुलोम, हास्य आसान सहित अन्य आसान करवाते हैं। योग से गांव के लोग निरोग होते गए तो रोज पीपल के नीचे अब योगा कक्षा लगती है। इससे सभी लोग योग कर निरोग रहते हैं।
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