पंकज तिवारी, नईदुनिया, जबलपुर। मदन महल से दमोहनाका तक बना प्रदेश का सबसे लंबा फ्लाईओवर अब शहर की नई लाइफलाइन बन चुका है। सात किलोमीटर लंबे इस एलिवेटेड कारिडोर ने न केवल शहर की यातायात व्यवस्था को नई दिशा दी है, बल्कि वर्षों से जाम और धीमी रफ्तार से परेशान लोगों को बड़ी राहत पहुंचाई है।
देश के कई शहरों के विशेषज्ञ परामर्श लेने भी पहुंच रहे हैं
जिस दूरी को तय करने में पहले 25 से 30 मिनट लग जाते थे, वही सफर अब महज छह से सात मिनट में पूरा हो रहा है। घनी आबादी के बीच बने फ्लाईओवर की संरचना निर्माण को लेकर देश के कई शहरों के विशेषज्ञ परामर्श लेने भी पहुंच रहे हैं।
देश का सबसे लंबा सिंगल स्पान केबल स्टेयड ब्रिज
करीब 1232 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित यह फ्लाईओवर प्रदेश की सबसे बड़ी शहरी आधारभूत संरचना परियोजनाओं में शामिल है। मदन महल स्टेशन पर देश का सबसे लंबा सिंगल स्पान केबल स्टेयड ब्रिज बना है।
लोक निर्माण विभाग के ईई शिवेंद्र सिंह ने बताया कि दमोहनाका, मदन महल जैसी घनी आबादी वाले इलाके में इस ब्रिज का निर्माण आसान नहीं था। ऐसे स्थान पर हुए निर्माण को देखने और सीखने नागपुर, इंदौर, बिलासपुर, उज्जैन और अन्य शहरों से इंजीनियरों की टीम जबलपुर आ चुकी है।
लगभग 335 किलोमीटर लंबी केबल का उपयोग हुआ
एलिवेटेड कारिडोर की सबसे बड़ी तकनीकी उपलब्धि रेलवे लाइन के ऊपर निर्मित देश का सबसे लंबा सिंगल स्पान केबल स्टे ब्रिज है। 385 मीटर लंबे इस ब्रिज में 192 मीटर का हिस्सा बिना किसी मध्य पिलर के बनाया गया है। इसमें लगभग 335 किलोमीटर लंबी केबल का उपयोग हुआ है।
ईंधन की खपत में कमी और तेज कनेक्टिविटी
डिजाइनिंग में फ्रांस की कंसल्टेंट कंपनी के साथ भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मुंबई और मद्रास के विशेषज्ञों की तकनीकी सहायता ली गई थी। लोगों के समय की बचत, ईंधन की खपत में कमी और तेज कनेक्टिविटी मिल रही है।
मजबूती भी दोगुनी
फ्लाईओवर की मजबूती भी इसे विशेष बनाती है, जहां सामान्य पुलों में एम-35 ग्रेड कंक्रीट का उपयोग किया जाता है, वहीं इसके पिलर एम-70 ग्रेड कंक्रीट से तैयार किए गए हैं। करीब डेढ़ लाख टन वजनी इस संरचना में दो लाख घनमीटर कंक्रीट, 20 हजार टन लोहा और लगभग 1100 किलोमीटर लंबा स्टील इस्तेमाल हुआ है। इसकी भार क्षमता 70 टन रखी गई है और इसे आने वाले कई दशकों की यातायात जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है।
दो करोड़ से बना बास्केटबाल कोर्ट
फ्लाईओवर के नीचे मदन महल थाने के पीछे खाली हिस्से में बास्केटबाल कोर्ट बनाया गया है। इसके करीब ही बच्चों की फुलवारी, ओपन जिम और आकर्षक बगिया सजाई गई है। मदन महल स्टेशन के दूसरी तरफ केबिल स्टेयड ब्रिज के नीचे बच्चों के लिए दो करोड़ रुपये से गार्डन तैयार किया गया है।
छह किलोमीटर के हिस्से में हरियाली
फ्लाईओवर के नीचे हरियाली की चादर ओढ़ाई गई है। आकर्षक फूल से लेकर डेकोरेटिव प्लांट लगाए गए हैं। पानी की कमी न हो इस लिए जगह-जगह बोरिंग कर ड्रिप इरीग्रेशन की सुविधा दी गई है। विभाग के दावे के अनुसार एलिवेटेड कारिडोर में वाटर हार्वेस्टिंग करने से बारिश के मौसम में करीब एक लाख लीटर वर्षा जल भूमिगत किया जा सकेगा।
एक नजर में फ्लाईओवर
- 1232 करोड़ रुपये लागत।
- सात किलोमीटर लंबाई।
- तीन बो-स्ट्रिंग ब्रिज शामिल हैं।
- रेल पथ के ऊपर देश का सबसे लंबा
- 385 मीटर केबिल स्टे ब्रिज है।
- 193.5 मीटर का सिंगल स्पान केबिल स्टे ब्रिज।
- 12 मीटर चौड़ाई।12 मीटर औसत ऊंचाई।
- 70 टन, केबिल स्टे ब्रिज की भार उठाने की क्षमता।
- 10 डिजिटल साइन बोर्ड जो दिशा सूचक बने हैं।
- 300 करोड़ की मशीनों का उपयोग निर्माण कार्य में हुआ।
- दो रोटरी मदन महल और दमोहनाका पर।
- आठ जगह रैंप के जरिए वाहन चालक चढ़-उतर सकते हैं।
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