आरोप है कि वरिष्ठ कार्यालय द्वारा आदेश पर रोक लगाए जाने के बावजूद संबंधित अधिकारी को प्रभार दिलाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। …और पढ़ें

HighLights
- आदिवासी विभाग जबलपुर में कमीशन का खेल
- संभागीय कार्यालय ने आदेश पर आपत्ति दर्ज की थी
- इस आदेश पर रोक लगाने के निर्देश दिए थे
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। जनजातीय कार्य विभाग में छात्रावासों के अतिरिक्त प्रभार को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। पनागर स्थित रिठौरी आदिवासी कन्या छात्रावास के अतिरिक्त प्रभार के आदेश को लेकर विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
शाहपुरा के घाट पिपरिया की अधीक्षिका को पनागर के रिठौरी का प्रभार
शाहपुरा विकासखंड के घाट पिपरिया छात्रावास में पदस्थ अधीक्षिका नेहा दवे को पनागर के रिठौरी आदिवासी कन्या छात्रावास का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया था। दोनों स्थानों के बीच लगभग 50 किलोमीटर की दूरी होने के कारण इस आदेश को अव्यावहारिक बताया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक संभागीय कार्यालय ने इस आदेश पर आपत्ति दर्ज करते हुए रोक लगाने के निर्देश दिए थे।
आवश्यकता पड़ने पर निवास की व्यवस्था सुनिश्चित करने का प्रविधान
इधर विभागीय सूत्रों का कहना है कि छात्रावास अधीक्षकों के लिए संस्थान में नियमित उपस्थिति और आवश्यकता पड़ने पर निवास की व्यवस्था सुनिश्चित करने का प्रविधान है। ऐसे में दूरस्थ स्थान पर पदस्थ अधिकारी को अतिरिक्त प्रभार दिए जाने से छात्रावास संचालन प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
आदेश के क्रियान्वयन को लेकर मतभेद की स्थिति बन गई
हाल ही में जारी स्थानांतरण नीति का हवाला देते हुए भी इस तरह के आदेशों पर सवाल उठाए जा रहे हैं। पूर्व सहायक आयुक्त सीके दुबे के कार्यकाल में यह आदेश जारी किया गया था। अब इस आदेश के क्रियान्वयन को लेकर विभाग के भीतर मतभेद की स्थिति बन गई है।
अधीक्षिका का सामना वर्तमान अधीक्षिका अन्नपूर्णा महोबिया से हुआ
वरिष्ठ अधिकारियों की आपत्तियों के बावजूद आदेश को लागू कराने का प्रयास किया गया। विवाद उस समय और बढ़ गया जब अतिरिक्त प्रभार ग्रहण करने के लिए पहुंची अधीक्षिका का सामना वर्तमान अधीक्षिका अन्नपूर्णा महोबिया से हुआ।
मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर विभिन्न तरह की चर्चाएं
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार दोनों पक्षों के बीच चर्चा के दौरान अन्नपूर्णा महोबिया की तबीयत बिगड़ गई। इसके बाद उन्हें एम्बुलेंस से रांझी अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका उपचार किया गया। मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर विभिन्न तरह की चर्चाएं हैं। हालांकि विभाग की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। पूरे मामले में विभागीय जांच और वरिष्ठ अधिकारियों के स्पष्ट निर्देशों के बाद ही वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी।
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