आउटसोर्स कर्मचारियों की सेवायोजन, अभिलेख संधारण और भुगतान में अनियमितताओं के मामले में फार्मासिस्ट ग्रेड-दो विकास यादव को निलंबित कर दिया है।

HighLights
- आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती में घोटाला
- स्वीकृत पदों से अधिक मिले कर्माचारी
- शासन पर पड़ा अतिरिक्त वित्तीय भार
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। आउटसोर्स कर्मचारियों की सेवायोजन, अभिलेख संधारण और भुगतान में अनियमितताओं के मामले में फार्मासिस्ट ग्रेड-दो विकास यादव को निलंबित कर दिया है। निलंबन आदेश मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉक्टर एमएस सागर ने जारी किया है।
जांच में प्रथम दृष्टया वित्तीय अनियमितता और कर्तव्यों के निर्वहन में लापरवाही सामने आने पर यह कार्रवाई की गई है। निलंबन अवधि में यादव का मुख्यालय सिविल अस्पताल डबरा निर्धारित किया गया है। उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा। विभागीय जांच में आरोपों का अंतिम निर्धारण किया जाएगा।
आदेश के अनुसार, आउटसोर्स कर्मचारियों के सेवायोजन, अभिलेख संधारण एवं भुगतान संबंधी शिकायतों की जांच कराई गई थी। जांच प्रतिवेदन में कई अनियमितताएं सामने आईं।
जांच में पाया गया कि स्वीकृत पदों एवं स्वीकृत संख्या से अधिक आउटसोर्स कर्मचारियों को काम पर रखा गया, जिससे स्वीकृत और वास्तविक रूप से कार्यरत कर्मचारियों की संख्या में अनावश्यक वृद्धि हुई और शासन पर अतिरिक्त वित्तीय दायित्व पड़ा। बता दें कि यह भर्ती तत्कालीन सीएमएचओ के कार्यकाल में हुई थीं।
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बिना वाहन के ड्राइवरों को भी रखा
जांच में यह भी सामने आया कि कुछ आउटसोर्स ड्राइवरों को सेवायोजित किया गया, जबकि संबंधित इकाई में उनके कार्य के लिए न तो शासकीय वाहन उपलब्ध था और न ही कोई अनुबंधित वाहन संचालित था। ऐसे में उनकी सेवाओं का अपेक्षित उपयोग नहीं हो सका और शासन पर अनावश्यक वित्तीय भार पड़ा।
अभिलेखों के सत्यापन में भी लापरवाही
आदेश में आउटसोर्स शाखा के प्रभारी के रूप में विकास यादव द्वारा अपेक्षित नियंत्रण, पर्यवेक्षण और अभिलेखीय सत्यापन नहीं किए जाने का भी उल्लेख किया गया है। इसके कारण अनावश्यक एवं अनियमित भुगतान की स्थिति निर्मित हुई। जांच में यह भी माना गया कि उन्होंने अपने अधीनस्थ कार्यों का अपेक्षित पर्यवेक्षण एवं नियंत्रण नहीं रखा।
