नई दिल्ली में आयोजित आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय की एपेक्स कमेटी की बैठक में इस महत्वाकांक्षी परियोजना को अंतिम स्वीकृति दे दी गई।
इस बड़ी वित्तीय सहायता के बाद अब इंदौर नगर निगम पर कर्ज का बोझ बेहद कम हो जाएगा। पहले निगम इस पूरे प्रोजेक्ट के लिए करीब 1600 रुपये करोड़ का लोन लेने की तैयारी में था, लेकिन अब केंद्र से मिलने वाली मदद और ब्लू बॉन्ड पर 100 रुपये करोड़ की सब्सिडी के दावे के बाद निगम को सिर्फ करीब 300 करोड़ रुपये का ही ऋण लेना पड़ेगा।
बजट का गणित और केंद्र की हिस्सेदारी
इस विशाल प्रोजेक्ट को दो मुख्य भागों में बांटा गया है:
जल प्रदाय परियोजनाएं: 907.74 करोड़ रुपये
सीवरेज परियोजनाएं: 308.80 करोड़ रुपये
केंद्रीय सहायता: कुल परियोजना लागत का 25 फीसदी हिस्सा (यानी करीब 302.70 करोड़ रुपये) केंद्र सरकार सहायता के रूप में देगी।
यह राशि नर्मदा परियोजना के चौथे चरण के तहत जल वितरण लाइन बिछाने और शहर में सीवरेज नेटवर्क का विस्तार करने पर खर्च की जाएगी।
1214 करोड़ रुपये से इंदौर शहर को क्या मिलेगा?
परियोजना के तहत शहर के बुनियादी ढांचे में बड़े बदलाव किए जाएंगे:
– 2.95 लाख नए नल कनेक्शन दिए जाएंगे।
– 1545 किमी नई जल वितरण लाइन बिछाई जाएगी।
– 545 किमी पुरानी और जर्जर पाइपलाइन को बदला जाएगा।
– 100 नई कॉलोनियों और क्षेत्रों को इस सीधे तौर पर लाभ मिलेगा।
– 2200 मिमी व्यास की ग्रेविटी मेन पाइपलाइन और रॉ वाटर पंपिंग मेन पाइपलाइन डाली जाएगी।
– 2.8 किमी लंबी माइक्रो टनल और राऊ में एक नया क्लोरिनेशन सिस्टम बनाया जाएगा।
– 52.2 किमी फीडर मेन पाइपलाइन और नए सब स्टेशन का निर्माण होगा।
– सीवरेज कार्य: चार पैकेज में सीवरेज कार्य (63, 64, 72) किए जाएंगे और 27.55 किमी नई सीवरेज लाइन बिछाई जाएगी।
बैठक में मप्र के अधिकारी हुए शामिल
वर्चुअल माध्यम से आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में मध्य प्रदेश शासन के नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे, नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल और यूडीडी के दिव्यांक सिंह शामिल हुए। मध्य प्रदेश से अर्बन चैलेंज फंड के लिए करीब 3,000 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट भेजे गए थे, जिसमें चार शहरों के प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिली है।
1. इंदौर: 1214.54 करोड़ रुपये
2. उज्जैन: 1000 करोड़ रुपये
3. जबलपुर: 350 करोड़ रुपये
4. रीवा: 99 करोड़ रुपये
महापौर पुष्यमित्र भार्गव का कहना है कि मध्य प्रदेश में सबसे अधिक राशि का प्रोजेक्ट हमारे इंदौर शहर को मिला है। पहले इस परियोजना के लिए नगर निगम पर 1600 करोड़ रुपये के कर्ज का अनुमान था, जो अब घटकर सिर्फ 300 करोड़ रुपये रह जाएगा। यह इंदौर के विकास में मील का पत्थर साबित होगा।
