सरकार अनुबंध अवधि समाप्त होने के बाद नई शर्तें शामिल कर नवीनीकृत अनुबंध के आधार पर आवश्यक प्रशासनिक निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र रहेगी।

HighLights
- संविदा कर्मियों को सेवा अवधि के बीच राहत
- ट्रांसफार्मर करने का निरस्त किया आदेश निरस्त
- संविदा नियुक्ति तय और निर्धारित कार्य के लिए होती है
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह की एकलपीठ ने अपने एक अहम आदेश में साफ किया कि यदि किसी संविदा कर्मचारी के नियुक्ति अनुबंध में स्थानांतरण का प्रविधान नहीं है, तो अनुबंध की अवधि के दौरान उसका स्थानांतरण नहीं किया जा सकता।
अनुबंध प्रभावी रहते हुए जारी स्थानांतरण आदेश विधिसम्मत नहीं
इस सिद्धांत को प्रतिपादित करते हुए याचिकाकर्ता संविदा कर्मचारियों के स्थानांतरण आदेश निरस्त कर दिया गया।
हालांकि कोर्ट ने उक्त आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि अनुबंध प्रभावी रहते हुए जारी स्थानांतरण आदेश विधिसम्मत नहीं है।
नियुक्ति अनुबंध में सेवा स्थानांतरण की कोई शर्त नहीं
सरकार अनुबंध अवधि समाप्त होने के बाद नई शर्तें शामिल कर नवीनीकृत अनुबंध के आधार पर आवश्यक प्रशासनिक निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र रहेगी। दरअसल, याचिकाकर्ता मुकेश कुमार उपाध्याय सहित अन्य की ओर से दलील दी गई कि नियुक्ति अनुबंध में एक स्थान से दूसरे स्थान पर सेवा स्थानांतरण की कोई शर्त नहीं है।
स्थानांतरण को उचित ठहराने का प्रयास किया
राज्य सरकार ने 24 फरवरी, 2020 के परिपत्र का हवाला देते हुए स्थानांतरण को उचित ठहराने का प्रयास किया, लेकिन अदालत ने पाया कि उक्त परिपत्र केवल विशेष परिस्थितियों में प्रशासनिक व्यवस्था के तहत स्थानांतरण की बात करता है, अनुबंध की मूल शर्तों को बदलने की नहीं।
दूसरे स्थान पर भेजना अनुबंध की भावना और शर्तों के विपरीत होगा
कोर्ट ने कहा कि संविदा नियुक्ति एक निश्चित स्थान और निर्धारित कार्य के लिए होती है। जब तक अनुबंध में स्थानांतरण की स्पष्ट शर्त न हो अथवा विशेष परिस्थितियां प्रमाणित न की जाएं, तब तक कर्मचारी को दूसरे स्थान पर भेजना अनुबंध की भावना और शर्तों के विपरीत होगा।
