आज दोनों उदीयमान खिलाड़ी चर्चाओं में हैं। कैंट स्कूल मैदान से हाकी सफर आरंभ कर रानीताल टर्फ में अभ्यास से यह प्रतिभा निखरी और सिद्धार्थ व आयुष अब मप्र …और पढ़ें

HighLights
- गरीबी को पीछे छोड़ दो बेटों ने अपने खेल से हाकी इंडिया को दिलाया ताज
- कैंट स्कूल के मैदान से निकलकर भारतीय हॉकी टीम तक तय किया सफर
- विपरीत हालातों से लड़कर मैन ऑफ द मैच बने मिडफील्डर सिद्धार्थ बेन
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। जापान में एशिया कप जीतने वाली भारतीय अंडर-18 पुरुष हॉकी टीम में शामिल जबलपुर के दो बेटे सिद्धार्थ बेन (मिडफील्डर) और आयुष रजक (गोलकीपर) की संघर्ष गाथा हर किसी को भावुक और प्रेरित करने वाली है। जब भारतीय टीम जापान में तिरंगा लहरा रही थी, तब कांचघर क्षेत्र के एक छोटे से किराए के मकान में जीत की दुआएं मांगी जा रही थीं।
आज दोनों उदीयमान खिलाड़ी चर्चाओं में हैं। कैंट स्कूल मैदान से हाकी सफर आरंभ कर रानीताल टर्फ में अभ्यास से यह प्रतिभा निखरी और सिद्धार्थ व आयुष अब मप्र हाकी अकादमी में भी प्रवेश पा चुके हैं। दोनों का संघर्ष अन्य समकक्ष खिलाड़ियों के लिए एक मिसाल है।
मां का साया बचपन में ही सिर से उठ गया था
सिद्धार्थ के पिता लेखराम जबलपुर में साइकिल रिक्शा चलाकर किसी तरह परिवार का पेट पालते हैं। सिद्धार्थ की मां का साया बचपन में ही सिर से उठ गया था। लेखराम ने बताया कि जब सिद्धार्थ मात्र 10 वर्ष का था, तभी उसका चयन हॉकी अकादमी में हो गया था। भीषण आर्थिक तंगी के बावजूद उसने कभी हिम्मत नहीं हारी।
खराब मौसम, भारी बारिश या तेज बुखार में भी सिद्धार्थ ने कभी अभ्यास नहीं छोड़ा। इसी लगन के दम पर उसे टूर्नामेंट में एक मुकाबले के दौरान ‘मैन ऑफ द मैच’ का पुरस्कार भी मिला। अब परिवार को उम्मीद है कि इस बड़ी सफलता के बाद सिद्धार्थ को एक अच्छी नौकरी मिलेगी, जिससे उनकी गरीबी दूर हो सकेगी।
आयुष की मां ने संघर्ष कर बेटे को बनाया श्रेष्ठ खिलाड़ी
ऐसी ही कुछ कहानी टीम के दूसरे खिलाड़ी आयुष रजक की भी है। आयुष की मां दूसरों के घरों में खाना बनाकर बेटे के सपनों को जिंदा रखे हुए हैं। विपरीत परिस्थितियों से लड़कर राष्ट्रीय टीम तक पहुंचे आयुष के घर में भी इस समय जश्न का माहौल है। हाकी मप्र के महासचिव लोकबहादुर ने बताया कि सिद्धार्थ और आयुष दोनों बेहद जुनूनी खिलाड़ी हैं और अब तक विभिन्न राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में 40 से अधिक पदक जीत चुके हैं।
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प्रदेश के खिलाड़ियों ने रचा इतिहास
विजेता टीम में मध्य प्रदेश के छह खिलाड़ी शामिल हैं, जिनमें जबलपुर के सिद्धार्थ और आयुष के अलावा गाजी खान (इटारसी), अभिमन्यु मानिकपुरी (भोपाल), करण गौतम (अमरिया) और अंश (होशंगाबाद) शामिल हैं। इसके साथ ही, अंडर-18 बालिका वर्ग में भी भारतीय टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक हासिल किया। इस महिला टीम में चार बेटियां नौशीन नाज (कटनी), स्नेहा डौड़े (बड़वानी), महक परिहार (इटारसी) और गीता श्री (ग्वालियर) शामिल थीं।
