नईदुनिया प्रतिनिधि, जांजगीर : बिना वैध लाइसेंस के एलोपैथिक दवाओं का भंडारण एवं विक्रय करने के मामले में विशेष न्यायालय (औषधि एवं प्रसाधन सामग्री) जांजगीर ने आरोपित को दोषी ठहराते हुए 3 वर्ष के सश्रम कारावास और एक लाख रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड की राशि अदा नहीं करने पर आरोपित को अतिरिक्त छह माह का सश्रम कारावास भुगतना होगा।
लोक अभियोजक जांजगीर संदीप सिंह बनाफर के अनुसार मामला ग्राम बिर्रा, ब्लाक बम्हनीडीह का है। मुखबिर से शिकायत मिलने पर औषधि निरीक्षक ने संयुक्त टीम के साथ 26 अप्रैल 2018 को ग्राम बिर्रा के दाऊ मोहल्ला स्थित आरोपित अशोक कुमार बिस्वास (64) के क्लीनिक की जांच की थी। जांच के दौरान आरोपित क्लीनिक में मरीजों की जांच करता मिला। क्लीनिक की तलाशी लेने पर वहां विभिन्न प्रकार की 35 एलोपैथिक दवाएं रखी मिलीं।
औषधि निरीक्षक द्वारा आरोपित से वैध औषधि अनुज्ञप्ति एवं दवाओं के क्रय-विक्रय संबंधी अभिलेख प्रस्तुत करने को कहा गया, लेकिन आरोपी दस्तावेज प्रस्तुत करने में असमर्थ रहा। जांच के दौरान क्लीनिक से मिली दवाओं को नियमानुसार जब्त कर सीलबंद किया गया। इसके बाद औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम के तहत आरोपी के विरुद्ध न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत किया गया।
यह भी पढ़ें- ट्रैवलिंग, मोबाइल और इंटरनेट अलाउंस भी आय का हिस्सा, छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से कुल पांच साक्षियों के बयान कराए गए। अभियोजन ने तर्क दिया कि आरोपी द्वारा बिना वैध अनुज्ञप्ति के विभिन्न एलोपैथिक दवाओं को विक्रय के उद्देश्य से रखना गंभीर अपराध है। विशेष न्यायाधीश जयदीप गर्ग ने अभियोजन साक्ष्यों एवं न्यायालयीन कथनों का परीक्षण करने के बाद आरोपित अशोक कुमार बिस्वास को औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम 1940 की धारा 27 (बी) (ii) के तहत दोषी पाया।
न्यायालय ने आरोपित को तीन वर्ष के सश्रम कारावास तथा एक लाख रुपये के अर्थदंड से दंडित किया।य अर्थदंड जमा नहीं करने पर छह माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतने का आदेश दिया गया। मामले में अभियोजन की ओर से लोक अभियोजक संदीप सिंह बनाफर ने पैरवी की।