कोर्ट ने कहा कि संदेह कितना भी मजबूत हो लेकिन प्रमाण का स्थान नहीं ले सकता। कोर्ट ने साक्ष्य में खामियां पाते हुए 12 अगस्त 2010 को सुनाए विचारण न्याया…और पढ़ें

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। वर्ष 1998 में सांवेर जनपद पंचायत में 207 शिक्षक कर्मी ग्रेड-3 की भर्ती में रिश्तेदारों को कथित रूप से अधिक अंक देकर चयन कराने के मामले में हाई कोर्ट ने भ्रष्टाचार में दोषी ठहराए जनपद पंचायत के तत्कालीन सदस्यों और अधिकारियों सहित आठ लोगों को दोषमुक्त कर दिया।
कोर्ट ने कहा कि संदेह कितना भी मजबूत हो लेकिन प्रमाण का स्थान नहीं ले सकता। कोर्ट ने साक्ष्य में खामियां पाते हुए 12 अगस्त 2010 को सुनाए विचारण न्यायालय के फैसले को निरस्त कर दिया।
यह था पूरा मामला
- वर्ष 1998 में सांवेर जनपद पंचायत में शिक्षक कर्मी ग्रेड-3 के 207 पदों पर भर्ती हुई थी।
- इसमें 2539 आवेदन आए थे। पदों की संख्या से तीन गुना अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए बुलाया गया।
- साक्षात्कार के बाद 207 अभ्यर्थियों का चयन किया गया। बाद में लोकायुक्त में शिकायत हुई कि चयन प्रक्रिया में गड़बड़ी की गई।
- पद का दुरुपयोग करते हुए कुछ अभ्यर्थियों को साक्षात्कार में शत प्रतिशत नंबर दिए गए।
- विचारण न्यायालय ने सभी आरोपितों को दो-दो साल कारावास की सजा सुनाई थी। इस फैसले के विरुद्ध अपील प्रस्तुत हुई।
