नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। एक तरफ स्कूल जाने की उम्र, दूसरी तरफ जान का जोखिम। विदिशा जिले के ककरुआ और आसपास के गांवों के बच्चों के सामने पढ़ाई के लिए हर दिन यही चुनौती है। बेतवा नदी पर बने स्टाप डैम के पिलरों पर संतुलन बनाकर बच्चे स्कूल पहुंच रहे हैं। पिलरों के बीच करीब चार फीट का खाली हिस्सा है और बारिश में नदी का जलस्तर बढ़ने पर खतरा और बढ़ जाता है। बच्चों की इस मजबूरी की तस्वीरें सामने आने के बाद हाई कोर्ट ने मामले का स्वतः संज्ञान लिया है।
हाई कोर्ट ने इसे बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा के अधिकार से जुड़ा गंभीर विषय माना है। स्वतः संज्ञान मामले में प्रदेश के मुख्य सचिव, लोक निर्माण विभाग के प्रमुख सचिव और विदिशा कलेक्टर सहित संबंधित अधिकारियों को प्रतिवादी बनाया गया है।
सुरक्षित रास्ता, मगर 10 से 16 किमी लंबा
बच्चों के लिए सड़क के जरिए स्कूल जाने का विकल्प मौजूद है, लेकिन यह रास्ता करीब 10 से 16 किलोमीटर लंबा है। छोटे बच्चों के लिए रोज इतनी अतिरिक्त दूरी तय करना व्यावहारिक नहीं है। ऐसे में वे जान का खतरा जानते हुए भी स्टाप डैम के पिलरों को ही रास्ता बना लेते हैं।
नौ पिलर, चार फीट का फासला
बेतवा नदी पर बने स्टाप डैम में नौ बड़े पिलर हैं। इनके बीच करीब चार फीट का खाली स्थान है। बच्चे इन्हीं पिलरों पर चलकर नदी पार करते हैं। इनमें छात्राएं भी शामिल हैं। बारिश के दौरान तेज बहाव और फिसलन के कारण किसी भी समय दुर्घटना हो सकती है।
न्यायिक टीम ने मौके पर पहुंचकर देखी स्थिति
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के निर्देश पर न्यायिक अधिकारियों की टीम ने मौके का निरीक्षण किया। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव भी टीम में शामिल रहे। निरीक्षण में सामने आया कि बच्चों के लिए सुरक्षित आवागमन के विकल्प सीमित हैं। क्षेत्र में हाई स्कूल की कमी भी समस्या को बढ़ा रही है।
प्रशासन ने बैरिकेडिंग कर चौकीदार तैनात किए
मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने स्टाप डैम के दोनों सिरों पर बैरिकेडिंग कराई है। बच्चों को इस रास्ते से रोकने के लिए चौकीदार भी तैनात किए गए हैं। इसके साथ ही शिक्षा विभाग ने किरमची बंधेरा के माध्यमिक विद्यालय को हाई स्कूल में उन्नयन करने का प्रस्ताव लोक शिक्षण संचालनालय को भेजा है।
अब अदालत की निगाह स्थायी समाधान पर
हाई कोर्ट में अब सरकार और संबंधित अधिकारियों से जवाब लिया जाएगा। सुनवाई के दौरान बच्चों की सुरक्षा, स्कूल तक पहुंचने के सुरक्षित साधन और क्षेत्र में शिक्षा सुविधाओं की स्थिति पर सरकार का पक्ष सामने आएगा। स्थायी समाधान के लिए सुरक्षित पुल, सड़क या स्थानीय स्तर पर हाईस्कूल की सुविधा जैसे विकल्पों पर भी विचार की जरूरत सामने आ सकती है।
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धार में भी सामने आ चुका है ऐसा मामला
प्रदेश में बच्चों के जोखिम उठाकर नदी पार कर स्कूल जाने का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले धार जिले में भी ऐसी तस्वीरें सामने आई थीं, जिस पर हाई कोर्ट ने गंभीर रुख अपनाया था। विदिशा का मामला फिर सवाल खड़ा कर रहा है कि क्या ग्रामीण बच्चों को स्कूल तक पहुंचने के लिए अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ेगी।
