शहर के शासकीय जिला चिकित्सालय विक्टोरिया के डाक्टरों की लापरवाही से एक श्रमिक गरीब महिला की नसबंदी के बाद भी तीसरी बार मां बनने का मामला सामने आया है। …और पढ़ें

HighLights
- जबलपुर में आर्थिक तंगी के कारण महिला ने कराई थी नसबंदी
- ऑपरेशन फेल होने पर मजबूरी में देना पड़ा तीसरे बच्चे को जन्म
- जबलपुर नसबंदी फेल मामले को माना ‘मानव अधिकार हनन’
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। शहर के शासकीय जिला चिकित्सालय विक्टोरिया के डाक्टरों की लापरवाही से एक श्रमिक गरीब महिला की नसबंदी के बाद भी तीसरी बार मां बनने का मामला सामने आया है। दो बच्चे होने के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण दुर्गा कॉलोनी, बरगी हिल्स निवासी 26 वर्षीय महिला ने शासकीय जिला चिकित्सालय विक्टोरिया में नसबंदी कराई थी।
मजबूरी में दिया बच्चे को जन्म
नसबंदी करा लेने के कुछ समय बाद उसे पुनः गर्भ ठहरने का अहसास हुआ। जब महिला ने तिलवारा स्थित स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराई और मेडिकल कॉलेज में सोनोग्राफी करवाई तो गर्भवती होने की पुष्टि हुई। तदोपरांत महिला को गर्भपात करवाने की सलाह अस्पताल द्वारा दी गई, तब तक गर्भ के सात माह हो चुके थे। फेल हुई नसबंदी के कारण महिला को मजबूरीवश तीसरे बच्चे को जन्म देना पड़ा।
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मानव अधिकार आयोग का हस्तक्षेप
तदोपरांत महिला ने कलेक्टर सहित जनसुनवाई में शिकायत दर्ज कराई और कार्यवाही तथा मुआवजा की मांग की, किन्तु कोई कार्यवाही नहीं हुई। मप्र मानव अधिकार आयोग की क्षेत्रीय कार्यालय प्रभारी फरजाना मिर्जा ने बताया कि समाचार पत्रों में प्रकाशित समाचार के आधार पर मामले को जनहित में संज्ञान लेकर, मप्र मानव अधिकार आयोग की मुख्य पीठ भोपाल में प्रकरण पर सुनवाई करते हुए, अध्यक्ष डॉ. अवधेश प्रताप सिंह की एकल पीठ ने प्रथम दृष्टया मानव अधिकारों के हनन का मामला मानकर, जबलपुर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) से मामले की जांच कराकर, की गई कार्यवाही का प्रतिवेदन दो सप्ताह में मांगा है।
