दरअसल, सौरभ शर्मा की ओर से दायर आवेदन में कहा गया था कि उनकी पत्नी दिव्या तिवारी को साइनस की सर्जरी करानी है तथा दो नाबालिग बच्चों की देखरेख के लिए उन …और पढ़ें

HighLights
- हाई कोर्ट की टिप्पणी-मेडिकल रिपोर्ट में नहीं दिखी आपात स्थिति, परिवार में अन्य सदस्य भी उपलब्ध।
- नियमित जमानत अर्जियां पूर्व में जिला अदालत, हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में भी राहत नहीं पा सकी हैं।
- उभयपक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुरक्षित रखा गया फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने याचिका निरस्त कर दी।
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने बहुचर्चित आरटीओ भ्रष्टाचार और मनी लांड्रिंग मामले के आरोपित पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा को राहत नहीं दी।
कोर्ट ने पत्नी की प्रस्तावित सर्जरी और बच्चों की देखभाल का हवाला देकर मांगी गई 60 दिन की अस्थायी जमानत अर्जी निरस्त कर दी। अपने आदेश में कहा कि प्रस्तुत मेडिकल दस्तावेजों में ऐसी कोई आपात स्थिति परिलक्षित नहीं होती, जिसके आधार पर अस्थायी जमानत दी जाए। साथ ही परिवार की देखभाल के लिए अन्य सदस्य उपलब्ध होने का तथ्य भी सामने आया है।
दरअसल, सौरभ शर्मा की ओर से दायर आवेदन में कहा गया था कि उनकी पत्नी दिव्या तिवारी को साइनस की सर्जरी करानी है तथा दो नाबालिग बच्चों की देखरेख के लिए उनकी उपस्थिति आवश्यक है।
वहीं प्रवर्तन एजेंसियों ने तर्क दिया कि शर्मा से जुड़े आर्थिक नेटवर्क में कई रिश्तेदार और सहयोगी शामिल रहे हैं, इसलिए परिवार की देखभाल के लिए अन्य व्यक्ति उपलब्ध नहीं होने का दावा स्वीकार्य नहीं है।
उभयपक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुरक्षित रखा गया फैसला सुनाते हुए हाई कोर्ट ने याचिका निरस्त कर दी। उल्लेखनीय है कि सौरभ शर्मा की नियमित जमानत अर्जियां पूर्व में जिला अदालत, हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में भी राहत नहीं पा सकी हैं।
