नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकलपीठ ने छिंदवाड़ा के बहुचर्चित जहरीले कफ सीरप कांड में आरोपित बाल रोग विशेषज्ञ एसएस ठाकुर की जमानत अर्जी निरस्त कर दी।
आवेदक परासिया निवासी ठाकुर ने दावा किया था कि वे 45 वर्षों से बाल रोग विशेषज्ञ के रूप में सेवाएं दे रहे हैं। उन्हें कफ सीरप में मिलावट की कोई जानकारी नहीं थी।
न ही निर्माता या वितरक से उनका कोई संबंध था। उनका कहना था कि बच्चों की मौत प्रतिबंधित दवा से नहीं, बल्कि सीरप में पाए गए जहरीले तत्व डायथिलीन ग्लाइकोल के कारण हुई।
राज्य शासन की ओर से जमानत अर्जी का कड़ा विरोध करते हुए तर्क दिया गया कि चार वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए प्रतिबंधित दवा लिखना गंभीर लापरवाही का परिचायक है।
मामले में प्रारंभिक साक्ष्य मजबूत हैं तथा आरोपित की भूमिका अत्यंत गंभीर है। ऐसे संवेदनशील प्रकरण में जमानत से जनविश्वास प्रभावित होगा। दोनों पक्षों को सुनने के बाद हाई कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जमानत आवेदन निरस्त कर दिया।
केंद्र के प्रतिबंध का नहीं किया गया पालन
कोर्ट ने अपने आदेश में साफ किया कि केंद्र सरकार द्वारा जारी प्रतिबंधात्मक निर्देशों के बावजूद चार वर्ष से कम आयु के बच्चों को फिक्स्ड डोज काम्बिनेशन वाली दवा लिखी गई, जिसके गंभीर परिणाम सामने आए और कई मासूमों की जान चली गई।
