भिंड समाचार: करीब 1 माह तक चले लगातार श्रमदान और इसके बाद जिला प्रशासन के सहयोग से अब तालाब की तस्वीर बदल गई है। हररेश्वर मंदिर के समीप स्थित तालाब मे…और पढ़ें

HighLights
- श्रमदान से प्रशासनिक सहयोग तक की यात्रा
- भूजल स्तर सुधार और पर्यावरणीय लाभ
- सुरक्षा जाली और सौंदर्यीकरण का खाका
मनोज श्रीवास्तव नईदुनिया, भिंड। करीब 90 साल पुराना तालाब… कभी ऊमरी कस्बे की जीवनरेखा, लेकिन समय के साथ उपेक्षा और जलकुंभी ने इसकी पहचान ही मिटा दी। पानी की जगह तालाब में गंदगी और जलकुंभी नजर आती थी। ग्रामीणों ने इससे दूरी बना ली थी। ऐसे में कस्बे के युवाओं ने ठाना कि इस ऐतिहासिक जलस्रोत को फिर से जीवित किया जाएगा।
करीब एक माह तक चले लगातार श्रमदान और इसके बाद जिला प्रशासन के सहयोग से अब तालाब की तस्वीर बदल गई है। हररेश्वर मंदिर के समीप स्थित तालाब में वर्षों बाद साफ पानी नजर आने लगा है। अब ग्राम पंचायत इसे पिकनिक स्पाट के रूप में विकसित करने की तैयारी कर रही है।
कभी पेयजल से सिंचाई तक का था सहारा
करीब एक बीघा क्षेत्र में फैला यह तालाब कभी ऊमरी की जरूरतों का प्रमुख स्रोत था। ग्रामीण इसके पानी का इस्तेमाल पेयजल, स्नान, कपड़े धोने के साथ खेतों की सिंचाई में भी करते थे। रखरखाव के अभाव में धीरे-धीरे इसमें जलकुंभी फैलती गई। कुछ वर्षों में स्थिति यह हो गई कि पूरा तालाब जलकुंभी से ढक गया। पानी का उपयोग बंद हो गया और यह स्थान गंदगी का केंद्र बन गया। इसके साथ ही आसपास के क्षेत्र में जल संकट भी बढ़ने लगा।
युवाओं ने उठाए फावड़े, एक माह तक किया श्रमदान
तालाब की स्थिति से चिंतित कस्बे के युवाओं ने इसे पुनर्जीवित करने का संकल्प लिया। उन्होंने किसी सरकारी योजना का इंतजार नहीं किया और स्वयं श्रमदान शुरू कर दिया। करीब एक माह तक युवा लगातार तालाब से जलकुंभी और गंदगी हटाने में जुटे रहे। युवाओं की इस पहल की चर्चा क्षेत्र में हुई तो इसकी जानकारी जिला प्रशासन तक पहुंची। प्रशासन ने भी जनभागीदारी की इस पहल को आगे बढ़ाया और मशीनों व आवश्यक संसाधनों की मदद से तालाब के जीर्णोद्धार का काम कराया।
अब पानी के साथ संरक्षण की भी तैयारी
तालाब की सफाई के बाद वर्षों से ढकी जलसतह अब दिखाई देने लगी है। ग्रामीणों में भी इसे लेकर उत्साह है। उनका कहना है कि तालाब केवल पानी का स्रोत नहीं, बल्कि ऊमरी की सामाजिक और सांस्कृतिक धरोहर भी है। इसके पुनर्जीवित होने से वर्षा जल का संचयन, भूजल स्तर में सुधार और आसपास के पर्यावरण को भी लाभ मिलने की उम्मीद है।
चारों ओर लगेगी जाली, विकसित होगा पिकनिक स्पॉट
ग्राम पंचायत ने तालाब को दोबारा उपेक्षित होने से बचाने की योजना भी बनाई है। सरपंच वीरेंद्र सिंह यादव के अनुसार तालाब के चारों ओर सुरक्षा जाली लगाई जाएगी, ताकि अतिक्रमण और गंदगी की समस्या दोबारा न हो। इसके साथ ही तालाब परिसर में हरियाली, बैठने की व्यवस्था और सौंदर्यीकरण के काम प्रस्तावित हैं। इसे पिकनिक स्पाट के रूप में विकसित करने की तैयारी है। इससे हररेश्वर मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के लिए भी यह आकर्षण का नया केंद्र बन सकेगा।
तालाब का पुनर्जीवन जनभागीदारी की बड़ी सफलता है। युवाओं ने जिस समर्पण से श्रमदान किया, वह पूरे जिले के लिए प्रेरणा है। प्रशासन ने भी इस पहल को आगे बढ़ाते हुए जीर्णोद्धार कराया है। अब तालाब का संरक्षण सुनिश्चित किया जाएगा और इसे विकसित कर लोगों के लिए आकर्षक स्थल बनाया जाएगा। – वीरसिंह चौहान, सीईओ, जिला पंचायत भिंड
