नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। खमरिया टापू यानी बरगी क्रूज हादसा स्थल। बच्चे-वयस्क समेत 13 लाशें यहीं से निकलीं। हादसे को 17 दिन हो चुके हैं। जांच के लिए पहले राज्य स्तरीय कमेटी बनी फिर एक सदस्यीय जांच आयोग का गठन किया। अभी तक असली वजह पता नहीं चल सकी। प्रशासन और पुलिस की जांच सिर्फ बयान लेने तक सीमित रही। इस पूरे मामले में तकनीकी खामियों से पर्दा उठाने वाले क्रूज के अवशेषों को लावारिस छोड़ दिया गया। हादसे के कुछ दिन तक पुलिस ने निगरानी की लेकिन अब वो भी नहीं है।
खमरिया टापू पर बिखरे पड़े हैं क्रूज के टुकड़े, सुरक्षा व्यवस्था नदारद
टापू पर सिर्फ नजदीक ही काम कर रहे मजदूर या फिर दो-चार लोग जो हादसे को करीब से समझना चाहते हैं वहीं आते हैं। क्रूज के इंजन से लेकर टुकड़े सब बिखरे हैं जिन्हें कभी भी कोई नष्ट या गायब कर सकता है। बरगी रिसॉर्ट के दो किलोमीटर पहले ही खमरिया टापू है। यह बरगी डैम का बैकवाटर है। यहीं नजदीक जल जीवन मिशन का इंटेक वेल का निर्माण हो रहा है। निर्माण स्थल पर हर समय मजदूर बने रहते हैं। 30 अप्रैल को बरगी रिसॉर्ट से निकला क्रूज डूब गया, जिसमें 41 लोग सवार थे। जिसमें 13 लोगों की मौत हो गई थी। शेष 28 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया था।
मुख्य सबूतों की अनदेखी से खड़े हो रहे गंभीर सवाल
क्रूज किन हालात में डूबा और सुरक्षा में क्या खामियां थीं? ये सारे सवालों के जवाब क्रूज के इंजन और उसके अवशेष से पता किए जा सकते हैं लेकिन जिस तरह मुख्य सबूत की सुरक्षा को लेकर अनदेखी की जा रही है इससे सवाल खड़े हो रहे हैं। मजदूरों ने कहा तीन-चार दिन से पुलिस भी नहीं- क्रूज के टुकड़े टापू के किनारे ही बिखरे पड़े हैं। यहां हादसे के बाद पुलिस के चार जवानों को निगरानी के लिए रखा गया था लेकिन पिछले तीन-चार दिन से वो भी नहीं आ रहे हैं।
सुरक्षा घेरे का अभाव और घटनास्थल की वर्तमान स्थिति
स्थानीय मजदूरों ने बताया कि कुछ दिन पहले तक पुलिस के जवान यहीं निर्माण स्थल के पास बैठकर निगरानी करते थे। अब वो भी नहीं आ रहे हैं। मजदूरों ने कहा कि गर्मी की वजह से शायद वे नहीं आ रहे हैं। हम लोग ही यहां हर समय रहते हैं। घटना स्थल को किसी भी सुरक्षा घेरे में नहीं रखा- पुलिस या जांच एजेंसी की तरफ से घटना स्थल को किसी भी सुरक्षा घेरे में नहीं रखा है। टापू पर क्रूज के अस्थिपंजर बिखरे हुए हैं। इसके इंजन और जरूरी सामग्री जिससे कुछ हालात को समझा जा सके ऐसे किसी भी अवशेष को सुरक्षित नहीं किया गया है।
अहम साक्ष्य गायब होने का खतरा और लोगों की आवाजाही
बताया जाता है कि आने वाले दिनों में एक सदस्यीय जांच आयोग भी यदि जांच करने पहुंचे तो संभव है कि बहुत से अहम टुकड़े मौके पर न मिलें। घटना की भयावहता को देखने आते हैं लोग- स्थानीय मजदूर विनोद यादव, राजेश साहनी समेत कई मजदूरों ने बताया कि यहां गांव और दो-चार बाहरी लोग आते हैं। वे घटना स्थल पर करीब से पहुंचकर क्रूज हादसे को समझने का प्रयास करते हैं। मजदूरों के अनुसार वैसे तो क्रूज के टुकड़ों को किसी ने नहीं छुआ है। जो जहां है वहीं पड़ा हुआ है।
जांच पर सवाल खड़े करने वाले प्रमुख बिंदु
- अवशेषों का खुले में पड़ा होना: क्रूज के टूटे हिस्से टापू पर लावारिस हालत में पड़े हैं। इससे छेड़छाड़, चोरी या सबूत नष्ट होने का खतरा बढ़ता है।
- रेस्क्यू के दौरान टुकड़े-टुकड़े करना: आरोप है कि रेस्क्यू के नाम पर क्रूज को जरूरत से ज्यादा काटा गया। इससे मूल संरचना और तकनीकी स्थिति समझना कठिन हो सकता है।
- तकनीकी खराबी के आरोप: रिसॉर्ट के मैनेजर की तरफ से पहले से इंजन खराब होने की सूचना प्रबंधन को दी गई थी।
- फोरेंसिक संरक्षण का अभाव: ऐसे मामलों में क्षेत्र सील कर तकनीकी विशेषज्ञों की निगरानी में साक्ष्य सुरक्षित रखे जाते हैं। यहां मजदूरों के भरोसे निगरानी की बात जांच की गंभीरता पर प्रश्न उठाती है।
- सीमित पुलिस सुरक्षा: केवल दो पुलिसकर्मियों की तैनाती बड़े हादसे के संवेदनशील सबूतों के लिहाज से अपर्याप्त मानी जा रही है।
- संभावित साक्ष्यों के नष्ट होने का खतरा: मौसम, पानी, जंग, मानवीय हस्तक्षेप या अव्यवस्थित रखरखाव से तकनीकी सबूत खराब हो सकते हैं।
क्रूज के अवशेष ये बता पाएंगे
- इंजन फेल हुआ था या नहीं? (इंजन के पार्ट्स, वायरिंग, फ्यूल सिस्टम और प्रोपेलर की जांच से पता चल सकता है।)
- इंजन अचानक बंद हुआ?
- ओवरहीटिंग हुई?
- मेंटेनेंस में लापरवाही थी?
- नकली या खराब पार्ट्स लगे थे? (बॉडी, वेल्डिंग और धातु के हिस्सों की जांच से पता चलता है।)
- कहीं जंग या दरार थी?
- निर्माण गुणवत्ता कमजोर थी?
- क्षमता से अधिक भार का असर पड़ा?
- हादसा तकनीकी था या मानवीय गलती? (स्टीयरिंग, Control System, ब्रेकिंग और दिशा नियंत्रण उपकरणों से समझा जा सकता है।)
- सुरक्षा मानकों का पालन हुआ था या नहीं? (लाइफ जैकेट, आपात उपकरण, फायर सेफ्टी सिस्टम, अलार्म आदि की स्थिति से पता चलता है…)
- सुरक्षा उपकरण पर्याप्त थे?
- उपयोग लायक थे कि नहीं थे?
जांच से पहले ये होना था
घटनास्थल सील किया जाता है।
अवशेष सुरक्षित गोदाम या यार्ड में रखे जाते हैं।
मलीन इंजीनियर और फोरेंसिक विशेषज्ञ जांच करते हैं।
फोटो, थ्रीडी मैपिंग और धातु परीक्षण होते हैं।
चालक, कर्मचारियों और प्रबंधन के बयान तकनीकी रिपोर्ट से मिलाए जाते हैं।
खमरिया टापू पर पड़े क्रूज के अवशेष की निगरानी के लिए चार पुलिस कर्मियों की ड्यूटी लगाई गई थी। इसके अलावा स्थानीय स्तर पर कार्य करने वाले मजदूरों को भी स्थल पर निगरानी के लिए कहा गया है। – सरिता पटेल, पुलिस चौकी प्रभारी बरगी नगर
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