बहुचर्चित ज्योति हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट की न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता व न्यायमूर्ति सतीश चन्द्र शर्मा की युगलपीठ ने सभी चार अपीलों पर संयुक्त रूप …और पढ़ें

HighLights
- कारोबारी पीयूष श्यामदसानी की अपील पर सुनवाई पूरी
- 19 जून के बाद आ सकता है सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
- प्रेमिका की रिहाई के खिलाफ सरकार पहुंची सुप्रीम कोर्ट
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। करीब 12 वर्ष पहले कानपुर में संदिग्ध परिस्थितियों में बुझा दी गई जबलपुर की बेटी पूजा उर्फ ज्योति की जिंदगी अब एक बार फिर न्याय की अंतिम चौखट पर है। बहुचर्चित ज्योति हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट की न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता व न्यायमूर्ति सतीश चन्द्र शर्मा की युगलपीठ ने सभी चार अपीलों पर संयुक्त रूप से अंतिम सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया है।
माना जा रहा है कि 19 जून के बाद निर्णय सुनाया जा सकता है। दरअसल, विवाह के पहले जबलपुर की जिस लड़की का नाम पूजा था, उसे ससुराल कानपुर पहुंचने के साथ ही ज्योति नाम दिया गया था। जबलपुर की इस पूजा की जीवन-ज्योति कानपुर में संदिग्ध परिस्थिति में बुझ गई थी।
विवाह के 17 माह बाद सुपारी देकर हत्या का आरोप
मामला 27 जुलाई, 2014 को कानपुर में हुए विवाह के बाद का है। अभियोजन के अनुसार विवाह के महज 17 माह बाद ज्योति की हत्या उसके पति, बिस्कुट कारोबारी पियूष श्यामदसानी ने अपनी कथित प्रेमिका मनीषा मखीजा व अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर षड्यंत्रपूर्वक कराई थी। आरोप है कि सुपारी देकर हत्या की साजिश रची गई थी।
हाई कोर्ट से मनीषा मखीजा को राहत
कानपुर सत्र न्यायालय ने 20 अक्टूबर, 2022 को पियूष श्यामदसानी, मनीषा मखीजा, अवधेश चतुर्वेदी, रेनू उर्फ अखलेश कनौजिया, सोनू कश्यप और आशीष कश्यप सहित छह आरोपितों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। हालांकि 29 नवंबर 2024 को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पांच दोषियों की सजा बरकरार रखते हुए मनीषा मखीजा को संदेह का लाभ देकर बरी कर दिया था।
उत्तर प्रदेश सरकार की याचिका
हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ दोषी पियूष श्यामदसानी, रेनू उर्फ अखलेश कनौजिया और सोनू कश्यप ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की है। वहीं मनीषा मखीजा को बरी किए जाने के विरुद्ध उत्तर प्रदेश सरकार ने भी विशेष अनुमति याचिका दाखिल कर उसे पुनः दोषसिद्ध किए जाने की मांग की है।
सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले पर टिकीं निगाहें
दो दिनों तक चली सुनवाई में सभी पक्षों के तर्क सुनने के बाद शीर्ष अदालत ने आदेश सुरक्षित रख लिया। पीड़िता के पिता शंकर नागदेव चारों मामलों में हस्तक्षेपकर्ता के रूप में शामिल रहे। उनकी ओर से अधिवक्ता आशुतोष घड़े ने पक्ष रखा। अब निगाहें सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले पर टिकी हैं, जो बहुचर्चित हत्याकांड में दोषसिद्धि और बरी होने के प्रश्न पर अंतिम मुहर लगाएगा।
