भोपाल में शिक्षक भर्ती अभ्यर्थियों का आंदोलन तेज हुआ। वर्ग-1, 2 और 3 के युवा भूख हड़ताल पर हैं। वे रिक्त पदों के बावजूद नियुक्तियां नहीं मिलने से नारा…और पढ़ें

HighLights
- भोपाल के नीलम पार्क में शिक्षक अभ्यर्थी भूख हड़ताल पर बैठे।
- वर्ग-1, वर्ग-2 और वर्ग-3 अभ्यर्थी आंदोलन में एकजुट।
- तबीयत बिगड़ने पर प्रियंका सिंह अस्पताल पहुंचीं, अनशन नहीं तोड़ा।
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। राजधानी भोपाल में शिक्षक भर्ती का मुद्दा अब एक बड़े और निर्णायक आंदोलन का रूप ले चुका है। प्रदेश में पहली बार ऐसा देखने को मिल रहा है जब वर्ग-1, वर्ग-2 और वर्ग-3 के अभ्यर्थी एक साथ एकजुट होकर नीलम पार्क में भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं।
इन युवाओं का सीधा आरोप है कि सरकार ने पात्रता और चयन परीक्षा के कड़े मापदंड तय किए, लेकिन परीक्षा पास करने के बावजूद पदों की संख्या इतनी कम है कि उन्हें नियुक्ति नहीं मिल पा रही है।
तबीयत बिगड़ने पर भी अनशन तोड़ने से इनकार
- आंदोलन के दौरान हालात अब गंभीर होते जा रहे हैं। भूख हड़ताल पर बैठीं वर्ग-2 की एक अभ्यर्थी प्रियंका सिंह की तबीयत अचानक खराब हो गई।
- मंगलवार को उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि जब तक मांगें पूरी नहीं होंगी, वे अपना अनशन नहीं तोड़ेंगी। अभ्यर्थियों का कहना है कि 31 अगस्त से इस धरने ने अब उग्र रूप धारण कर लिया है और वे पीछे हटने वाले नहीं हैं।
1.15 लाख शिक्षकों की कमी, फिर भी पद सीमित क्यों?
- धरने में शामिल अभ्यर्थी लेखा दास ने बताया कि मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में करीब 1.15 लाख शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं, फिर भी सरकार नाममात्र के पदों पर भर्ती कर रही है। साल 2024 में पात्रता और 2025 में चयन परीक्षा आयोजित की गई थी।
- इसमें सामान्य वर्ग के लिए पासिंग मार्क्स 50% और आरक्षित वर्ग (ओबीसी, एससी, एसटी) के लिए 40% तय किए गए थे। हैरानी की बात यह है कि दीप्ति राय (99.60%), ममता गौतम (99.06%) और श्रेष्ठ जोशी (99.047%) जैसे टॉपर अभ्यर्थियों को भी ऊंचे अंक लाने के बावजूद पदों की कमी का हवाला देकर नौकरी से वंचित रखा जा रहा है।
ये हैं प्रदर्शनकारियों की दो प्रमुख मांगें
आंदोलन कर रहे युवाओं (जिसमें लगभग 15 हजार अभ्यर्थी वर्ग-2 और इतने ही वर्ग-3 के बताए जा रहे हैं) ने सरकार के सामने मुख्य रूप से दो सूत्रीय मांगें रखी हैं:
- वर्ग-2: इस वर्ग के तहत हर विषय में कम से कम 3-3 हजार पदों की वृद्धि की जाए।
- वर्ग-3: इस वर्ग के अंतर्गत कुल 25 हजार पदों पर नियुक्ति दी जाए।
अभ्यर्थियों का स्पष्ट कहना है कि सरकार का रवैया विरोधाभासी है। एक तरफ शासन खुद स्वीकार कर रहा है कि स्कूलों में शिक्षकों का टोटा है, वहीं दूसरी तरफ सभी योग्यताएं पूरी करने वाले होनहार युवाओं को पदों की कमी बताकर बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है। इसी नाइंसाफी ने अभ्यर्थियों को भूख हड़ताल जैसे कठोर कदम उठाने पर मजबूर कर दिया है।
यह भी पढ़ें- महिला ओबीसी कोटे की 12 सीटों पर पुरुषों की नियुक्ति, याचिकाकर्ता को तीन लाख मुआवजा
