बेंच ने महाधिवक्ता प्रशांत सिंह को मुख्यमंत्री से चर्चा कर न्यायपालिका के बजट से जुड़े मुद्दे का व्यावहारिक समाधान अगली सुनवाई में प्रस्तुत करने कहा ह…और पढ़ें

HighLights
- महाधिवक्ता को मुख्यमंत्री से चर्चा के निर्देश
- नए भवन का प्रस्ताव फरवरी 2021 से लंबित
- शहरों में कोर्ट रूम की कमी पर चिंता जताई
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर । हाई कोर्ट ने न्यायिक अधोसंरचना के लिए बजट उपलब्ध कराने के मामले में राज्य सरकार को गंभीरता से विचार करने के निर्देश दिए हैं। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया व न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने कहा कि न्यायपालिका को किसी सामान्य सरकारी विभाग की तरह नहीं माना जा सकता।
2009 से न्यायालय किराए के भवन में संचालित
दरअसल, यह मामला अनूपपुर न्यायालय भवन के निर्माण से संबंधित जनहित याचिका का है। कोर्ट को बताया गया कि वर्ष 2009 से न्यायालय किराए के भवन में संचालित है और नए भवन का प्रस्ताव फरवरी 2021 से लंबित है।
व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के निर्देश दिए गए थे
पिछली सुनवाई में वित्त सचिव और विधि सचिव को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के निर्देश दिए गए थे। सुनवाई में कोर्ट ने भोपाल सहित प्रमुख शहरों में कोर्ट रूम की कमी पर भी चिंता जताई।
न्यायिक अधोसंरचना की जरूरत को टाला नहीं जा सकता
बेंच ने कहा कि न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाना तभी प्रभावी होगा, जब उनके लिए पर्याप्त कोर्ट रूम उपलब्ध हों। केवल बजट समाप्त होने का हवाला देकर न्यायिक अधोसंरचना की जरूरत को टाला नहीं जा सकता।
प्रस्तावित निर्माण के लिए 45.87 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत
महाधिवक्ता ने बताया कि प्रस्तावित निर्माण के लिए 45.87 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत हो चुकी है, लेकिन वित्तीय कारणों से राशि जारी नहीं हुई। कोर्ट ने इस पर महाधिवक्ता को मुख्यमंत्री से चर्चा कर ठोस समाधान प्रस्तुत करने कहा। अगली सुनवाई 30 सितंबर को होगी।
