आलोक बनर्जी, नईदुनिया, जबलपुर। नईदुनिया की नई चुनौती के लिए तैयार है देश, साथ ही एडवांस तकनीक पर हमारा फोकस है। रक्षा क्षेत्र में तकनीक के बेहतर इस्तेमाल को लेकर हम कृत संकल्पित हैं। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आत्मनिर्भर भारत की ओर हम तेजी से कदम बढ़ा रहे है। यह बात रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को मुख्य अतिथि की आसंदी से कही। वे वाहन निर्माणी जबलपुर (वीएफजे) में टी सीरीज टैंक के ओवरहाल प्रोजेक्ट की आधारशिला रख रहे थे।

अब आयात पर निर्भर नहीं, निर्यात पर जोर
रक्षामंत्री बोले-मिसाइल, ड्रोन व टैंक के सभी उपयोगी साजो-सामान देश में भी बन रहे हैं। अब हम आयात पर निर्भर नहीं, बल्कि निर्यात पर जोर है। यह विकसित भारत की एक बेहतरीन तस्वीर पेश करने का सफल प्रयास है। जबलपुर रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में एक प्रमुख हब के रूप में उभरे इसके लिए प्रयास जारी है।

10 साल में रक्षा उत्पादन लक्ष्य रिकार्ड अंक तक पहुंचा
उन्होंने कहा कि 2014 में रक्षा उत्पादन महज 46 हजार करोड़ था। वर्तमान सरकार ने प्रयास किए, नई तकनीक और बेहतर सोच के तालमेल से मेहनत रंग लाई और आज भारत का घरेलू रक्षा उत्पादन बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड 1.80 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। पिछले एक दशक में रक्षा उत्पादन में लगभग चार गुना की वृद्धि दर्ज की गई है। मेक इन इंडिया और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसी पहलों के कारण भारतीय रक्षा उत्पाद अब दुनिया के अनेक देशों में पहुंच रहे हैं।

वीएफजे को 472 करोड़ का महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट मिला
इससे पहले रक्षामंत्री राजनाथ सिंह गुरुवार को अपने प्रवास पर जबलपुर पहुंचे। यहां उन्होंने वाहन निर्माणी जबलपुर परिसर में टी-72 टैंक के अपग्रेडेशन और आधुनिकीकरण प्लांट की आधारशिला रखी। इस 472 करोड़ रुपये की परियोजना से सेना की मारक क्षमता बढ़ेगी और स्वदेशी रक्षा उत्पादन को नई गति मिलेगी।

जबलपुर को मिली एक अलग पहचान
कार्यक्रम में मुख्य मंत्री डा मोहन यादव ने कहा कि रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में जबलपुर एक अलग पहचान रखता है और इस नए टी सीरीज प्रोजेक्ट से शहर ही नहीं अपितु पूरे प्रदेश का गौरव बढ़ेगा। साथ ही एमएसएमई के माध्यम से युवा हाथों को काम मिलेगा। प्रदेश में निवेश बढ़े इसको लेकर सरकार सतत प्रयास कर रही है।

टी-72 टैंक आयरन वॉल की तरह करेगा कार्य
- रक्षा मंत्री के अनुसार विशेषज्ञ मानते थे कि ड्रोन-मिसाइल के इस दौर में टैंक एक पुराना हथियार है।
- इसकी क्षमता और बेहतर प्रदर्शन से इंकार नहीं किया जा सकता है।
- टी-72 व टी-92 टैंक को तकनीक से जोड़ते हुए और उन्नत बनाने का लक्ष्य लेकर कार्य हो रहा है।
- यह सीमा पर आयरन वॉल (दीवार) की तरह कार्य करेगा।
वीएफजे हर साल 80 टैंकों को देगा मजबूत आधार
वाहन निर्माणी जबलपुर में टी सीरीज टैंक ओवरहाल प्रोजेक्ट के माध्यम से हर साल 80 टैंकों को मजबूत आधार प्रदान करते हुए नया रूप दिया जाएगा। चेन्नई स्थित अवाडी फैक्ट्री 150 टैंक की मरम्मत करेगी। इस तरह जबलपुर व अवाडी में टी-72 व टी-90 टैंक की ओवरहाल के बाद सेना केा कुल 230 टैंक नए रूप में हर साल मिलेंगे।

ये रहे उपस्थित
आर्मर्ड व्हीकल निगम लिमिटेड (एवीएनएल) की इकाई वीएफजे में कार्यक्रम के दौरान सांसद आशीष दुबे, लोनिवि मंत्री राकेश सिंह, महापौर जगत बहादुर सिंह, विधायक अशोक रोहाणी, अभिलाष पांडे, रक्षा उत्पादन विभाग के सचिव संजीव कुमार, रक्षा उत्पादन विभाग की संयुक्त सचिव डा गरिमा भगत, एवीएनएल सीएमडी सत्यव्रत मुखर्जी, निदेशक वित्त राजीव कुमार शर्मा, वीएफजे सीजीएम प्रवीण कुमार सहित अन्य उपस्थित थे।
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