महिला और उसकी बेटी को पुलिस द्वारा रास्ते में रोककर हिरासत में लेने के आरोपों से बुधवार को विवाद खड़ा हो गया।
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HighLights
- मुख्यमंत्री से मिलने जा रही महिला और उसकी बेटी को पुलिस ने रास्ते में रोका
- निगरानी और मीडिया से बात न करने के बदले रुपये देने की पेशकश का दावा किया
- पुलिस की कार्रवाई पर सवाल, न्याय नहीं मिलने पर दोबारा मिलने जा रही थी
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मिलने मानस भवन जा रही एक महिला और उसकी बेटी को पुलिस द्वारा रास्ते में रोककर हिरासत में लेने के आरोपों से बुधवार को विवाद खड़ा हो गया। महिला ने आरोप लगाया कि सुबह से ही उसकी गतिविधियों पर पुलिस नजर रख रही थी। ब्यौहारबाग के पास उसे रोककर जबरन वाहन में बैठाया गया और देर शाम तक थाने में रखा गया। महिला ने इस दौरान मारपीट किए जाने का भी आरोप लगाया है।
न्याय दिलाने का भरोसा दिया गया था
महिला का कहना है कि कुछ समय पहले मुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान उसे भोपाल बुलाकर न्याय दिलाने का भरोसा दिया गया था, लेकिन कई सप्ताह बीत जाने के बाद भी उसके मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसी कारण वह अपनी बेटी के साथ मुख्यमंत्री से दोबारा मिलने जा रही थी।
अजाक थाने में रखा गया
पीड़िता के अनुसार, उसे और उसकी बेटी को मदन महल थाना क्षेत्र स्थित अजाक थाने में रखा गया। महिला का आरोप है कि उन्हें ऐसे कमरे में बैठाया गया, जहां सीसीटीवी कैमरे भी नहीं थे। उसने यह भी दावा किया कि उसकी गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही थी और मोबाइल लोकेशन भी ट्रैक की जा रही थी।
पत्रकार को भी पुलिस ने करीब दो घंटे तक रोके रखा
महिला ने यह भी आरोप लगाया कि घटना की कवरेज के लिए पहुंचे एक पत्रकार को भी पुलिस ने करीब दो घंटे तक रोके रखा। पत्रकारों के विरोध के बाद उन्हें छोड़ दिया गया, जबकि महिला को देर शाम तक थाने में रखा गया। महिला का दावा है कि मीडिया से बात नहीं करने के बदले उसे 20 हजार से 50 हजार रुपये तक का प्रलोभन दिया गया, जिसे उसने ठुकरा दिया।
