मां वाग्देवी के दर्शन के लिए प्रतिदिन श्रद्धालु उमड़ रहे हैं। सुबह जैसे ही भोजशाला के द्वार खुलते हैं, वैसे ही जय मां वाग्देवी के जयकारों से परिसर गूं …और पढ़ें

HighLights
- मां वाग्देवी के दर्शन के लिए प्रतिदिन श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है
- सुबह जैसे ही भोजशाला के द्वार खुलते हैं, वैसे ही जय मां वाग्देवी के जयकारे गूंजने लगते हैं
- अब यहां प्रतिदिन सुबह और संध्या आरती का क्रम भी नियमित रूप से चल रहा है
नईदुनिया प्रतिनिधि, धार। धार की ऐतिहासिक भोजशाला इन दिनों आस्था, इतिहास और उत्साह का अद्भुत संगम बनी हुई है। मां वाग्देवी के दर्शन के लिए प्रतिदिन श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। सुबह की पहली किरण के साथ जैसे ही भोजशाला के द्वार खुलते हैं, वैसे ही जय मां वाग्देवी….के जयकारों से पूरा परिसर गूंज उठता है। अब यहां प्रतिदिन सुबह और संध्या आरती का क्रम भी नियमित रूप से चल रहा है।
धार ही नहीं, बल्कि महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान सहित कई राज्यों से श्रद्धालु यहां पहुंच रहे हैं। कोई इतिहास जानने आता है तो कोई मां वाग्देवी के चरणों में माथा टेकने। शनिवार को भी सूर्योदय के साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालु भोजशाला पहुंचे। सुबह 9 बजे विश्व हिंदू परिषद के पूर्व अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष हुकुमचंद सांवला व सुप्रीम कोर्ट के वकील अश्वनी उपाध्याय भी भोजशाला पहुंचे।
भोज उत्सव समिति के गोपाल शर्मा, हेमंत दौराया और सुमित चौधरी ने उन्हें भोजशाला का भ्रमण करवाया तथा यहां के ऐतिहासिक महत्व की जानकारी दी। दोनों अतिथियों ने मां वाग्देवी के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और बाद में मीडिया से चर्चा करते हुए भोजशाला को आगामी पांच वर्षों में विश्व स्तर पर पहचान दिलाने तथा सरस्वती लोक… विकसित करने की बात कही गई।
शिक्षा और संस्कृति का प्राचीन केंद्र रही भोजशाला
-सांवला ने कहा कि इतिहास स्वयं प्रमाण देता है कि भोजशाला, राजा भोज द्वारा स्थापित ज्ञान और शिक्षा का केंद्र रही है। यहां 64 कलाओं की शिक्षा दी जाती थी। भोजशाला के पत्थरों और शिलालेखों में आज भी उसकी सांस्कृतिक विरासत स्पष्ट दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि ये स्थान मां सरस्वती का मंदिर है और इसे मस्जिद कहना राजा भोज और भारतीय संस्कृति का अपमान है। उन्होंने कहा कि जनभावनाओं के अनुरूप यहां दिव्य अयोध्या की तर्ज पर भव्य मां वाग्देवी मंदिर का निर्माण होना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी भारतीय संस्कृति और ज्ञान परंपरा से जुड़ सकें।
भोजशाला को फिर ज्ञान और अध्यात्म का केंद्र बनाना होगा
सुप्रीम कोर्ट में धार्मिक मामले में पैरवी कर चुके वकील अश्वनी उपाध्याय ने कहा कि भोजशाला की मुक्ति के लिए वर्षों तक संघर्ष करने वाले धार के लोगों का योगदान कभी भुलाया नहीं जा सकता। जिन लोगों ने लाठी-डंडे खाकर भी आंदोलन को जिंदा रखा, उन्हें पूरा देश प्रणाम करता है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि भोजशाला को उसका प्राचीन गौरव लौटाया जाए। जिस तरह उज्जैन में महाकाल लोक और काशी विश्वनाथ कारिडोर विकसित किए गए हैं, उसी तर्ज पर यहां “सरस्वती लोक” बनाया जाना चाहिए। इससे देश-दुनिया से श्रद्धालु और विद्यार्थी यहां पहुंच सकेंगे।
विद्यारंभ संस्कार की शुरुआत का सुझाव
उपाध्याय ने कहा कि सनातन परंपरा में विद्यारंभ संस्कार का विशेष महत्व है। बच्चों की शिक्षा की शुरुआत मां सरस्वती के आशीर्वाद से होनी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि भोजशाला में विधिवत विद्यारंभ संस्कार शुरू किया जाए, ताकि देशभर से परिवार अपने बच्चों को यहां लाकर शिक्षा का शुभारंभ कर सकें। भोजशाला केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा का प्रतीक है। इसके सर्वांगीण विकास के लिए योजना बनानी चाहिए और आगामी पांच वर्षों में भोजशाला को विश्व पटल पर नई पहचान दिलाने के प्रयास होने चाहिए।
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