नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। निजी मेडिकल कॉलेजों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के विद्यार्थियों को आरक्षण का लाभ दिलाने की कवायद अब केंद्र सरकार तक पहुंच गई है। हाईकोर्ट की युगलपीठ ने इस मुद्दे से जुड़े पुराने मामले में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय को पक्षकार बनाने की अनुमति देते हुए केंद्र से जवाब मांगा है।
वहीं, इसी मुद्दे पर दायर नई याचिका में कोर्ट ने राज्य शासन और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) को नोटिस जारी किए हैं। दोनों मामलों में अधिवक्ता मनोज चतुर्वेदी याचिकाकर्ताओं की ओर से पैरवी कर रहे हैं।
2024 से लंबित मामले में केंद्र को बनाया पक्षकार
रिट याचिका अथर्व चतुर्वेदी विरुद्ध मध्यप्रदेश शासन एवं अन्य में सुनवाई में याचिकाकर्ता की ओर से केंद्र सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय को पक्षकार बनाने का अनुरोध किया गया। युगलपीठ ने मौखिक आवेदन स्वीकार करते हुए केंद्र सरकार को पक्षकार बनाने की अनुमति दे दी।
याचिकाकर्ता ने निजी मेडिकल कॉलेजों में ईडब्ल्यूएस अभ्यर्थियों को समायोजित करने के लिए सामान्य वर्ग की सीटों की संख्या बढ़ाने के मुद्दे पर केंद्र का पक्ष रिकॉर्ड पर लेने की मांग की थी।
कोर्ट ने डिप्टी सॉलिसिटर जनरल सुयश मोहन गुरु को केंद्र की ओर से नोटिस स्वीकार करने और दो सप्ताह में जवाब प्रस्तुत करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 11 सितंबर 2026 को होगी।
नई याचिका में प्रवेश प्रक्रिया फैसले के अधीन
इसी मुद्दे पर रिट याचिका कुमारी दरक्षा अंजुम सहित अन्य विरुद्ध मध्यप्रदेश शासन एवं अन्य में ईडब्ल्यूएस वर्ग के अभ्यर्थियों ने निजी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश की मांग की है। प्रशासनिक न्यायाधीश आनंद पाठक व न्यायमूर्ति बीपी शर्मा की युगलपीठ ने राज्य शासन और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग को नोटिस जारी किए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रवेश प्रक्रिया याचिका के अंतिम परिणाम के अधीन रहेगी।
2024 के आदेश का दिया हवाला
याचिकाकर्ताओं ने 17 दिसंबर 2024 के इसी पुराने मामले में हाईकोर्ट द्वारा राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग को निजी मेडिकल कॉलेजों में ईडब्ल्यूएस आरक्षण लागू करने के लिए एक वर्ष के भीतर सीटें बढ़ाने संबंधी निर्देश का हवाला दिया है।
अब केंद्र को पक्षकार बनाए जाने के बाद उसके जवाब पर मामले की आगे की दिशा निर्भर करेगी। निजी मेडिकल कॉलेजों में ईडब्ल्यूएस आरक्षण लागू करने और सीटें बढ़ाकर ईडब्ल्यूएस अभ्यर्थियों को समायोजित करने के मुद्दे पर हाईकोर्ट की सुनवाई अब महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच गई है।
