नईदुनिया प्रतिनिधि, रायसेन। भगवान गौतम बुद्ध के प्रमुख शिष्यों सारिपुत्र और महामोग्गलान के पवित्र अस्थि कलश इस माह के अंत में रायसेन जिले के सांची से कड़ी सुरक्षा और विशेष प्रोटोकॉल के तहत मंगोलिया भेजे जाएंगे। जिला प्रशासन, आईबीसी और संस्कृति मंत्रालय तैयारियों को अंतिम रूप दे रहे हैं।
ऐसे जाएगी यात्रा
सांची स्थित चेतियागिरी विहार से विधिवत प्रार्थना और पूजा के बाद 29 मई को कलश निकाले जाएंगे। गौतम बुद्ध की प्रतिमा के समक्ष इन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाएगा, फिर विशेष सुरक्षा के साथ भोपाल राजा भोज हवाई अड्डे ले जाया जाएगा। यहां से कलश पहले दिल्ली के राष्ट्रीय संग्रहालय पहुंचेंगे और अगले दिन वायुयान से मंगोलिया रवाना होंगे। कलश 9 जून तक गंडन तेगचेनलिंग मठ में आमजन के दर्शन के लिए रखे जाएंगे। इस दौरान महाबोधि सोसायटी के भिक्षु भी साथ रहेंगे।
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वापसी की प्रक्रिया
10 जून को कलश पुनः दिल्ली लाए जाएंगे और 11 जून को प्रोटोकॉल के साथ भोपाल होते हुए सांची पहुंचेंगे। यहां फिर विशेष वंदना और गार्ड ऑफ ऑनर के बाद इन्हें चेतियागिरी विहार में सुरक्षित स्थापित किया जाएगा।
वैश्विक बौद्ध आस्था के लिए आयोजन
पूरे आयोजन को लेकर आईबीसी दिल्ली के डायरेक्टर कर्नल यश सक्सेना, राष्ट्रीय संग्रहालय के डायरेक्टर डॉ. विमल कुमार, टूरिज्म एंड कल्चर मप्र के डिप्टी सेक्रेटरी राजेश कुमार गुप्ता, एडीएम मनोज उपाध्याय, एसडीओपी प्रतिभा शर्मा, एसडीएम मनीष शर्मा ने महाबोधि सोसायटी के भिक्षु इंचार्ज स्वामी विमलतिस्स थेरो, एडवाइजर शकील सिद्दीकी और तपस्सी भंते की मौजूदगी में विस्तृत बैठक की।
बैठक में सुरक्षा, धार्मिक परंपराओं और अंतरराष्ट्रीय प्रोटोकॉल के सभी पहलुओं पर सहमति बनाते हुए यह निर्णय लिया गया कि कलशों की यात्रा पूरी गरिमा, श्रद्धा और निर्धारित नियमों के अनुरूप संपन्न कराई जाएगी, ताकि यह आयोजन वैश्विक बौद्ध आस्था का महत्वपूर्ण प्रतीक बन सके।
