हाल ही में कलेक्टर हर्ष सिंह के न्यायालय ने एक आदेश पारित कर ग्राम डवाली खुर्द की खसरा नंबर 61 की 2.02 हेक्टेयर जमीन से वर्तमान भूमि स्वामी शिवम कुमार…और पढ़ें

HighLights
- बुरहानपुर में जमीन का खुर्दबुर्द करने का दूसरा मामला
- बेशकीमती जमीनों की कुंडली निकालेगा प्रशासन
- पहले असीरगढ़ में बेची गई थी सरकारी पट्टे की जमीन
नईदुनिया प्रतिनिधि, बुरहानपुर। पट्टे पर दी गई सरकारी जमीनों को खुर्दबुर्द करने का दूसरा मामला सामने आने के बाद प्रशासन के कान खड़े हो गए हैं। अब ऐसी सभी बेशकीमती पट्टे वाली जमीनों की कुंडली खंगालने की तैयारी की जा रही है, जिनके खुर्दबुर्द होने की आशंका ज्यादा है। हालांकि, इस संबंध में अभी कोई अधिकृत आदेश जारी नहीं किया गया है, लेकिन विभागीय सूत्र दावा कर रहे हैं।
ज्ञात हो कि हाल ही में कलेक्टर हर्ष सिंह के न्यायालय ने एक आदेश पारित कर ग्राम डवाली खुर्द की खसरा नंबर 61 की 2.02 हेक्टेयर जमीन से वर्तमान भूमि स्वामी शिवम कुमार को बेदखल कर जमीन राजस्व रिकार्ड में शासकीय दर्ज करने के लिए कहा है। दरअसल यह भूमि 1985-86 में गोट्या पुत्र भवडू निवासी अंबाड़ा को पट्टे पर आवंटित की गई थी। इसके बाद उनके वारिसों के नाम दर्ज होती रही। बाद में यह कई लोगों को बेची गई।
कुछ समय पहले रसूलपुर निवासी शोएब ने कलेक्टर को आवेदन देकर इसकी शिकायत की थी। जिसके बाद इस पर सुनवाई की गई और भूमि सरकारी पट्टे की पाए जाने पर यह फैसला सुनाया गया है।
पहले असीरगढ़ की बेची गई थी जमीन
ज्ञात हो कि इससे पहले नवंबर 2025 में असीरगढ़ के पास स्थित करोड़ों की सरकारी पट्टे वाली जमीन को बेचने का मामला सामने आया था। एक आरटीआई कार्यकर्ता द्वारा इसकी शिकायत करने के बाद कलेक्टर ने मामले को गंभीरता से लिया था। इस प्रकरण की भी सुनवाई करते हुए इसे गलत तरीके से विक्रय करना पाया गया था।
कलेक्टर न्यायालय ने चापोरा निवासी सुधीर पाटिल को बेची गई पट्टे वाली सरकारी जमीन से बेदखल कर भूमि को राजस्व रिकार्ड में शासकीय दर्ज करने का आदेश जारी किया था। हालांकि इस मामले में बाद में शिकायत करने वालों पर ही ब्लैकमेलिंग व रंगदारी वसूलने का आरोप सामने आया था। जिस पर उनकी गिरफ्तारी भी की गई थी।
न एनओसी देखी, न अनुमति पत्र
हाल ही में सामने आए मामले में चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि सरकारी जमीन एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को न केवल बेची जाती रही, बल्कि उसका नामांतरण भी होता रहा, लेकिन किसी ने न तो एनओसी देखी और न अनुमति संबंधी दस्तावेज मांगे। पंजीयन कार्यालय से लेकर पटवारी तक ने आंख मूंदकर जमीन की रजिस्ट्री व नामांतरण कर दिया।
मामले में पैरवी करने वाले अधिवक्ता निखिल खंडेलवाल ने बताया कि कलेक्टर ने अपने आदेश में भी उल्लेख किया है कि पट्टेदार के वारिस अयोध्या पुत्र गोट्या और गोपीबाई पुत्री गोट्या द्वारा जमीन शिवराम को बेचने के दौरान सक्षम अधिकारी की अनुमति नहीं ली गई। कलेक्टर न्यायालय ने इसे मध्यप्रदेश भू राजस्व संहिता की धारा 165-7-ख का उल्लंघन माना है।
