शिकायत के आधार पर सिविल लाइन थाना पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचना, जालसाजी और धमकी सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर गुरुवार को आरोपित क …और पढ़ें

HighLights
- सेवानिवृत्त प्रोफेसर के सोने के मामले में मुकदमे का डर दिखाया
- पुलिस ने नेम प्लेट लगी कार, वर्दी और फर्जी दस्तावेज जब्त किए
- आरोपी मनीष गुबरेले जालौन का है रहने वाला
नईदुनिया प्रतिनिधि, दतिया। एंटी करप्शन ब्यूरो झांसी का फर्जी इंस्पेक्टर बनकर सराफा कारोबारी से 29.50 लाख रुपये ठग लिए गए। शातिर बदमाश को सिविल लाइन थाना पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपी ने सराफा कारोबारी को एफआईआर और जेल भेजने का डर दिखाया। लंबे समय तक फर्जी पहचान पत्र, सरकारी दस्तावेज और काली वर्दी का रौब दिखाकर फंसाए रहा। जब कारोबारी को शंका हुई तो उसने झांसी मुख्यालय पहुंचकर पता किया और राज खुल गया। उसके पास से राष्ट्रीय असिस्टेंट प्रमुख एंटी करप्शन विजिलेंस फोर्स की नेमप्लेट लगी कार, फर्जी तीन स्टार लगी वर्दी और लेटरपेड आदि कागजात भी जब्त हुए हैं। आरोपी मनीष गुबरेले जालौन का रहने वाला है।
पुलिस के अनुसार भटियारा मोहल्ला निवासी सराफा कारोबारी प्रियांश सिंघल की नपा परिसर में सराफा की दुकान है। उन्होंने शिकायत दर्ज कराई कि जनवरी 2025 में पीजी कालेज के सेवानिवृत्त प्रोफेसर एके गुप्ता निवासी चउदा का बाडा दतिया उनकी दुकान पर आए थे। गुप्ता ने दावा किया कि उनका 100 ग्राम सोना उनके दिवंगत पिता रामू अग्रवाल पर बकाया है। पिता की प्रतिष्ठा को देखते हुए प्रियांश ने 26 मई 2025 को सोना उसे सौंप दिया।
जेल भेजने की दी धमकी दी
इसके कुछ समय बाद ही एक व्यक्ति काली वर्दी पहनकर दुकान पर पहुंचा और एंटी करप्शन ब्यूरो झांसी का इंस्पेक्टर मनीष कुमार बताया। उसने कथित एफआईआर की प्रति और पहचान पत्र दिखाते हुए कहा कि एके गुप्ता ने शिकायत दर्ज कराई है। मामले को गंभीर बताते हुए जेल भेजने की धमकी दी। प्रियांश के मुताबिक डरा धमकाकर उनसे पहले 10 लाख रुपये लेकर मामला समाप्त कराने का प्रस्ताव रखा। 10 जून और 12 जून 2025 को पांच-पांच लाख रुपये लिए।
फिर एके गुप्ता के संतुष्ट नहीं होने का हवाला देते हुए 25 जून को पांच लाख और 15 जुलाई को 10 लाख रुपये और वसूल लिए। बाद में फाइल आगे बढ़ने और एफआर लगाने की बात कहकर 20 अगस्त को 4.5 लाख रुपये और इस तरह उसने अलग-अलग किश्तों में कुल 29 लाख 50 हजार रुपये ले लिए। लगातार सरकारी अधिकारी होने का रौब दिखाता रहा, जिससे पीड़ित फंसा रहा।
इस तरह सामने आया सच
पूरे मामले को लेकर प्रियांश ने एके गुप्ता से बातचीत की और शिकायत समाप्त कराने और मामले को निपटाने के लिए दी गई रकम का जिक्र किया। इस पर एके गुप्ता ने किसी भी प्रकार की शिकायत या कार्रवाई की जानकारी होने से इनकार कर दिया। प्रियांश झांसी स्थित एंटी करप्शन ब्यूरो कार्यालय पहुंचा।
वहां पता चला कि मनीष कुमार नाम का कोई इंस्पेक्टर वहां पदस्थ नहीं है और न ही उसके खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज की गई थी। इसके बाद उसे ठगी का एहसास हुआ और उसने दतिया पुलिस से शिकायत की। शिकायत के आधार पर सिविल लाइन थाना पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचना, जालसाजी और धमकी सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर गुरुवार को आरोपित को गिरफ्तार कर लिया।
