कान्हा टाइगर रिजर्व में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (सीडीवी) की आशंका के बीच बाघों की मौत के मामले में हाई कोर्ट ने गुरुवार को राज्य सरकार से विस्तृत जवाब …और पढ़ें

HighLights
- सभी नौ टाइगर रिजर्व पर मांगी रिपोर्ट
- राज्य सरकार से विस्तृत जवाब लिया
- बूस्टर डोज देने की तैयारी की जा रही
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। कान्हा टाइगर रिजर्व में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (सीडीवी) की आशंका के बीच बाघों की मौत के मामले में हाई कोर्ट ने गुरुवार को राज्य सरकार से विस्तृत जवाब लिया। प्रशासनिक न्यायमूर्ति आनंद पाठक व न्यायमूर्ति बीपी शर्मा की युगलपीठ के समक्ष शासन ने बताया कि कान्हा टाइगर रिजर्व क्षेत्र में अब तक दो हजार कुत्तों का वैक्सीनेशन किया जा चुका है तथा उन्हें बूस्टर डोज देने की तैयारी भी की जा रही है।
इस पर हाई कोर्ट ने निर्देश दिया कि टाइगर रिजर्व से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट के सभी निर्देशों का कड़ाई से पालन किया जाए।
सभी नौ टाइगर रिजर्व पर मांगी रिपोर्ट
युगलपीठ ने निर्देश दिए कि प्रदेश के सभी नौ टाइगर रिजर्व में रिक्त पड़े वाइल्ड लाइफ वेटरनरी डॉक्टरों के पद शीघ्र भरे जाएं। साथ ही डॉग्स बर्थ कंट्रोल की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। कोर्ट ने केवल कान्हा ही नहीं, बल्कि सभी टाइगर रिजर्व में कुत्तों के वैक्सीनेशन और संक्रमण रोकथाम के उपायों पर भी राज्य सरकार से विस्तृत जवाब मांगा। मामले की अगली सुनवाई 17 अगस्त को होगी।
जनहित याचिका पर सुनवाई
मुंबई निवासी अधिवक्ता सुब्रत चक्रवर्ती की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि बाघों की सुरक्षा से जुड़े वैधानिक और प्रशासनिक प्रोटोकाल का अक्षरश: पालन होना चाहिए। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अंशुमान सिंह और प्रतीक रूसिया ने पक्ष रखा।
एक माह में आठ बाघों की मौत से बढ़ी चिंता
जनहित याचिका के अनुसार अप्रैल-मई 2026 के दौरान बाघिन टी-122 (सुनैना), टी-141 (अमाही), उसके चार अर्धवयस्क शावकों, युवा नर बाघ टी-220 (महावीर) सहित कुल आठ बाघों की मौत हुई। याचिका में सीडीवी संक्रमण की आशंका जताते हुए वैज्ञानिक निगरानी, जैव-सुरक्षा और पशु चिकित्सा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की गई है।
