नईदुनिया प्रतिनिधि, विदिशा। कहते हैं कि वक्त जब करवट लेता है, तो कुछ ही सेकंड में महीनों की तपस्या पर पानी फिर जाता है। ऐसा ही एक मार्मिक और भावुक कर देने वाला नजारा विदिशा के गर्ल्स कॉलेज परीक्षा केंद्र के बाहर देखने को मिला।
जहां नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) देने आई एक छात्रा मात्र दो मिनट की देरी के कारण परीक्षा देने से वंचित रह गई। साल भर की मेहनत को अपनी आंखों के सामने मटियामेट होते देख बेटी केंद्र के बाहर ही फूट-फूट कर रोने लगी। अपनी लाडली को इस तरह बिखरते देख 70 किलोमीटर दूर से बाइक चलाकर लाए पिता के सब्र का बांध भी टूट गया और वे भी परीक्षा केंद्र के गेट पर ही रो पड़े।
70 किमी का सफर, लेकिन बारिश और पंचर ने छीन ली ‘एंट्री’
रविवार को विदिशा मुख्यालय के चार केंद्रों पर नीट यूजी की परीक्षा आयोजित की गई थी। इस परीक्षा में शामिल होने के लिए कुरवाई तहसील के ग्राम कूल्हा निवासी रागनी विश्वकर्मा अपने पिता उमेश विश्वकर्मा के साथ सुबह ही घर से निकली थीं।
पिता-पुत्री को करीब 70 किलोमीटर का लंबा सफर तय करना था। लेकिन रास्ते में अचानक मौसम बदल गया और तेज बारिश होने लगी। इसी बीच उनका वाहन भी पंचर हो गया। इन दिक्कतों से जूझते हुए जब वे परीक्षा केंद्र पहुंचे, तो निर्धारित समय से मात्र दो मिनट की देरी हो चुकी थी।
रागनी के पिता ने गेट पर खड़े सुरक्षाकर्मियों और अधिकारियों के सामने हाथ जोड़े, मिन्नतें कीं, लेकिन नियमों की कड़ाई के आगे बेबसी ही हाथ लगी।
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तीन लेयर की सुरक्षा, पानी की बोतल के स्टीकर तक उतरवाए
नीट परीक्षा को लेकर इस बार सुरक्षा और सख्ती के इंतजाम सातवें आसमान पर थे। केंद्रों पर सुबह 11 बजे से ही परीक्षार्थियों की सघन चेकिंग शुरू कर दी गई थी। परीक्षा कक्ष में प्रवेश से पहले छात्रों को तीन लेयर की कड़ी सुरक्षा जांच से गुजरना पड़ा। पहचान पत्रों की बारीकी से जांच और बायोमेट्रिक सत्यापन के बाद ही एंट्री दी गई।
सख्ती का आलम यह था कि परीक्षार्थियों के जूते-चप्पल तो दूर, पानी की बोतल पर चिपके कंपनी के नाम के स्टीकर तक हटवा दिए गए थे। इसी कड़ाई के चलते नोडल अधिकारी एवं केंद्रीय विद्यालय की प्राचार्या गीता भदौरिया की कोशिशों के बाद भी समय बीत जाने के कारण रागनी का बायोमेट्रिक सत्यापन नहीं हो सका।
पहले से कठिन था पेपर
एक तरफ जहां रागनी जैसी छात्राएं परीक्षा देने से वंचित रहने के कारण रो रही थीं, वहीं दूसरी ओर परीक्षा देकर बाहर निकले परीक्षार्थियों के चेहरों पर भी मायूसी साफ झलक रही थी। गंजबासौदा से परीक्षा देने आईं स्नेहा रघुवंशी और नयना अहिरवार ने बताया कि पहली बार उन्होंने दिन-रात एक करके पढ़ाई की थी, लेकिन इस बार दोबारा परीक्षा होने के कारण पहले जैसा फोकस और पढ़ाई नहीं हो पाई।
परीक्षार्थी रिद्धि उपाध्याय और अंशुज ने बताया कि पिछली बार की तुलना में इस बार का प्रश्न पत्र काफी कठिन था और परीक्षा केंद्र के भीतर कड़ाई भी बहुत ज्यादा थी।
बता दें कि विदिशा के सभी चारों केंद्रों पर कुल 1709 परीक्षार्थी दर्ज थे, जिनमें से 1580 परीक्षा में शामिल हुए, जबकि 129 छात्र अनुपस्थित रहे। लेकिन इन सब आंकड़ों के बीच, केंद्र के बाहर रोते हुए उस बेबस पिता और बेटी की तस्वीर हर किसी के कलेजे को छलनी कर गई।
