कोर्ट ने कहा कि यदि अभ्यर्थी बिना दिव्यांग आरक्षण के भी ओबीसी मेरिट के आधार पर चयन योग्य था, तो उसकी सेवा समाप्ति उचित नहीं मानी जा सकती। …और पढ़ें

HighLights
- ओबीसी मेरिट के आधार पर पुनर्विचार के निर्देश
- मामला दमोह निवासी राहुल पटेल से जुड़ा है
- 40 प्रतिशत से कम दिव्यांग पाया गया है
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति विशाल धगट की एकलपीठ ने प्राथमिक शिक्षक भर्ती के एक महत्वपूर्ण मामले में दिव्यांग श्रेणी में चयनित अभ्यर्थी की सेवा समाप्ति का आदेश निरस्त कर जिला शिक्षा अधिकारी, दमोह को प्रकरण पर पुनर्विचार करने के निर्देश दिए हैं।
प्राथमिक शिक्षक के रूप में ओबीसी-दिव्यांग श्रेणी में हुई थी भर्ती
मामला दमोह निवासी राहुल पटेल से जुड़ा है, जिनकी नियुक्ति 30 मार्च, 2023 को प्राथमिक शिक्षक के रूप में ओबीसी-दिव्यांग श्रेणी में हुई थी। नियुक्ति के बाद दिव्यांगता की पुनः जांच में उन्हें 40 प्रतिशत से कम दिव्यांग पाया गया। इसके आधार पर जिला शिक्षा अधिकारी ने 24 जून 2024 को उनकी सेवाएं समाप्त कर दी थीं।
ओबीसी (ओपन) श्रेणी में समायोजित किया जाना चाहिए था
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर व अधिवक्ता हितेंद्र कुमार गोह्लानी ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि राहुल पटेल की ओबीसी मेरिट रैंक 2417 तथा प्राप्तांक 108.68 हैं।
अभ्यर्थियों को ओबीसी वर्ग में नियुक्त किया
विभाग ने उनसे कम अंक प्राप्त अनेक अभ्यर्थियों को ओबीसी वर्ग में नियुक्त किया है। ऐसे में उन्हें ओबीसी (ओपन) श्रेणी में समायोजित किया जाना चाहिए था।
विशेष आरक्षण कोटे की सीट पर नहीं गिना जा सकता
सुनवाई में सर्वोच्च न्यायालय के सौरभ यादव बनाम उत्तर प्रदेश राज्य, इंद्रा साहनी बनाम भारत संघ तथा आर.के. सभरवाल बनाम पंजाब राज्य मामलों का हवाला देते हुए बताया गया कि वर्टिकल और हारिजान्टल आरक्षण के सिद्धांतों के अनुसार यदि अभ्यर्थी सामान्य अथवा अपनी सामाजिक श्रेणी की मेरिट से चयनित हो सकता है तो उसे विशेष आरक्षण कोटे की सीट पर नहीं गिना जा सकता।
नियमानुसार नया आदेश पारित किया जाए
हाई कोर्ट ने सेवा समाप्ति आदेश निरस्त करते हुए जिला शिक्षा अधिकारी को निर्देश दिया है कि राहुल पटेल के मामले का मेरिट के आधार पर पुनर्मूल्यांकन किया जाए तथा पात्र पाए जाने पर नियमानुसार नया आदेश पारित किया जाए।
