जबलपुर की गन कैरिज फैक्ट्री में अपग्रेड स्वदेशी सारंग तोप फिर सेना का हिस्सा बनने जा रही है। 130 एमएम तोप को 155 एमएम में अपग्रेड कर इसकी मारक क्षमता …और पढ़ें

HighLights
- जीसीएफ में सारंग तोप का उत्पादन फिर शुरू।
- 130 एमएम तोप को 155 एमएम में बदला।
- सारंग की मारक क्षमता 36-40 किलोमीटर तक।
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। गन कैरिज फैक्ट्री (जीसीएफ) में अपग्रेड स्वदेशी सारंग तोप भारतीय सेना के बेड़े का महत्वपूर्ण हिस्सा बनने जा रही है। सोवियत-युग की 130 एमएम तोपों को अपग्रेड करके तैयार की गई यह 155 एमएम कैलिबर की तोप दुश्मनों पर अचूक और गहरी मार करने में पूरी तरह सक्षम है।
महत्वपूर्ण है कि इस सत्र में निर्माणी सेना के लिए फिर से स्वदेशी गन बनाएगी। पहले चरण में तैयार गन का परीक्षण एलपीआर में संभावित है। जिसके बाद नई खेप पर कार्य शुरू होगा।
नया आकार देने की कोशिश
- श्रमिक सूत्रों के अनुसार सारंग गन पर पूर्व में कुछ तकनीकी कमियों के कारण इसके उत्पादन पर संदेह जताया जाने लगा था। हालांकि निर्माणी की दक्ष टीम की कार्यकुशलता के कारण इसे नया आकार देने का प्रयास किया गया है। ताकि मोर्चे पर एक बार फिर यह गन अपनी ताकत का बेहतरीन प्रदर्शन कर सके।
