नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। मृत्यु के पश्चात नेत्रदान करने से कार्निया की अंधता से पीड़ित दो व्यक्तियों को नई दृष्टि और रोशन जीवन मिलता है। नेत्रदान महादान, श्रेष्ठ दान, एक स्वैच्छिक और पवित्र कार्य है, जिसके तहत कोई भी व्यक्ति भी व्यक्ति इसमें सहभागिता कर सकता है ताकि किसी नेत्रहीन व्यक्ति के जीवन में रोशनी लौट सके। जरूरत की तुलना में दान का प्रतिशत काफी कम है। इस गेप को समाज के प्रत्येक वर्ग के सहयोग से भरा जा सकता है। समय के साथ बस आवश्यकता जागरूक होने की है।
अंधत्व की अनुभूति रैली एक अभिनव पहल
ब्लाइंड फोल्डेड वाक (अंधत्व की अनुभूति रैली) उसी कड़ी का एक हिस्सा है जिसके माध्यम से अपनी आंखों पर पट्टी बांधकर चलकर हम सबने उस चुनौती को महसूस किया, और कुछ पट्टी हटाने व्याकुल हो गए। जबकि यह कठिनाई और चुनौती से हमारे दृष्टिहीन भाई-बहन हर रोज गुजरते हैं। यह बात रविवार को रैली की अगुवाई कर रहे नेत्र रोग विशेषज्ञ डाक्टर पवन स्थापक ने कही।
प्रत्येक वर्ग ने बढ़-चढ़कर सहभागिता की
इससे पहले राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा के प्रकाश में समदृष्टि क्षमता विकास व अनुसंधान मंडल (सक्षम) और दादा वीरेंद्रपुरी रोटरी नेत्र बैंक के संयुक्त तत्वावधान में एक विशेष नेत्रदान जागरूकता रैली आयोजित की गई। अंधत्व की अनुभूति थीम पर आयोजित रैली का सुबह पंडित रविशंकर शुक्ल क्रीड़ांगन (राइट टाउन स्टेडियम) के प्रवेश द्वार के पास से आरंभ हुई और तीन पत्ती चौक, मालवीय चौक, भारत माता चौक, सिविक सेंटर होते हुए वंदे मातरम उद्यान पहुंची, जहां इस रैली का समापन हुआ। रैली में सबसे आगे 10 से अधिक दिव्यांगजन थे, जो कि ट्राइसिकिल पर सवार थे।
आंख पर पट्टी बांधकर रस्सी के सहारे लोग आगे बढ़े
खुली आंखों से मंजिल पाना होता है आसान, लेकिन आंख पर पट्टी बांधकर चुनौती पर जीत कितनी कठिन इसका एहसास रैली में शामिल 2 हजार से अधिक संस्कारधानी के बच्चे, युवा, महिला-पुरुष, बुजुर्ग सहित विभिन्न सामाजिक, धार्मिक, राजनीतिक व खेल संगठनों से जुड़े लोगों ने किया। जूडो खिलाड़ियों के एक ग्रुप की अगुवाई करते हुए कोच आबिद हुसैन खान आंख में पट्टी बांधे लोगों को मार्ग में आगे बढ़ने में सहयोग कर रहे थे।
एक किलोमीटर का सफर -स्टेडियम से वंदे मातरम उद्यान तक करीब एक किलोमीटर का सफर तय करने के लिए रैली में सहभागिता कर रहे आंखों में पट्टी बांधे लोगों को सिर्फ रस्सी का सहारा मिला और वे आगे बढ़े।
एक सर्किल -आयोजकों ने रस्सी का एक सर्किल बना रखा था, उसके अंदर लोग थे और एक-दूसरे के सहारे आगे बढ़ते गए। कोई कांधे पकड़े चल रहा था तो कोई हाथ।
रैली के सहभागी बने
इस कार्यक्रम में समस्त रोटरी क्लब, स्टेडियम परिवार, गुड मार्निंग क्लब, जबलपुर डिविजनल ओफ्थल्मिक सोसाइटी, सुप्रभातम परिवार, महाकोशल चैंबर आफ कामर्स, दादा वीरेंद्रपुरी नेत्र संस्थान (देवजी नेत्रालय), दृष्टिहीन कन्या शाला, शासकीय दृष्टिहीन विद्यालय, इनरव्हील क्लब जबलपुर व जूडो क्लब सहित 11 से अधिक संस्थाओं ने इसमें सहभागिता की।
ये भी चले पट्टी बांधकर
कार्यक्रम में डॉ. पवन स्थापक, महापौर जगत बहादुर सिंह, विधायक सुशील तिवारी, पूर्व विधायक विनय सक्सेना, पार्षद कमलेश अग्रवाल, जेडीए अध्यक्ष संदीप जैन, सुधांशु गुप्ता, रवि गुप्ता, डॉ. आयुष टंडन, डॉ. राजीव सक्सेना, डॉ. सुनील बहल, डॉ. एमके स्थापक, डॉ. श्रीनिवास राव, डॉ. अंकित सेठ, डॉ. अर्पिता स्थापक, डॉ. अपूर्वा स्थापक, एड अपर्णा स्थापक, अनुपमा स्थापक, श्याम साहनी उपस्थित थे।
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फैक्ट फाइल
- 02 हजार से अधिक लोग आयोजन के साक्षी बने।
- 01 किमी की रैली में आंख पर पट्टी बांधे सभी रस्सी पकड़कर आगे बढ़े।
- 11 से अधिक विभिन्न संगठनों ने इसमें लिया भाग।
- 10 से अधिक दिव्यांग ट्राइसाइकिल पर आगे चल रहे थे।
