नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कालेज अस्पताल परिसर स्थित एआरटी (एंटी रेट्रोवायरल थेरेपी) सेंटर शुक्रवार सुबह एक बड़े हादसे से बाल-बाल बच गया।
सुबह करीब 11:15 बजे शार्ट सर्किट से सेंटर में आग भड़क उठी, जिससे पूरे परिसर में अफरा-तफरी मच गई। बिजली उपकरणों में लगी आग की चिंगारियां कर्मचारियों पर भी गिरीं, लेकिन वे किसी तरह जान बचाकर बाहर निकल आए।
उसी समय एचआईवी जांच के लिए पंजीयन कराने पहुंचीं गर्भवती महिलाओं ने भी घबराकर सेंटर से बाहर भागकर अपनी जान बचाई। आग लगते ही दूसरे विभाग से अग्निशमन यंत्र लाकर कर्मचारियों ने आग बुझाने का प्रयास किया, दमकल को भी सूचना दी गई।
समय रहते आग पर काबू पा लिया गया, जिससे बड़ा नुकसान टल गया। गौरतलब है कि इस एआरटी सेंटर में प्रतिदिन प्रदेश के विभिन्न जिलों से 150 से अधिक एचआईवी मरीज उपचार और दवा लेने पहुंचते हैं।
ऐसे में जर्जर भवन में संचालित यह महत्वपूर्ण स्वास्थ्य केंद्र मरीजों और कर्मचारियों दोनों की सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन चुका है।
सेंटर की बदहाली पर सवाल
- घटना के बाद कर्मचारियों ने सेंटर की बदहाल स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े किए। एआरटी सेंटर में पदस्थ दिलीप पटेल, आशीष मिश्रा, मीराबाई और गार्ड कुलदीप ने बताया कि भवन लंबे समय से जर्जर हालत में है। दीवारों में भारी सीलन और नमी के कारण कई बार करंट लगने की घटनाएं हो चुकी हैं।
-आग सुबह करीब 11:15 बजे शार्ट सर्किट से लगी।
-चिंगारियां कर्मचारियों पर गिरीं, लेकिन सभी सुरक्षित बाहर निकल आए।
-पंजीयन के लिए आईं गर्भवती महिलाओं में भी अफरा-तफरी मच गई।
-सेंटर में 22 जिलों के एचआइवी मरीजों की करोड़ों की दवाएं सुरक्षित रखी जाती हैं, उन पर भी खतरा।
-प्रतिदिन 150 से अधिक मरीज इलाज और दवा लेने यहां पहुंचते हैं।
आप यह भी जानें
-जर्जर भवन में संचालित हो रहा एआरटी सेंटर।
-दीवारों की सीलन से पहले भी लग चुके हैं करंट के झटके।
-करोड़ों की दवाएं और लाखों की मशीनें खतरे में।
-कर्मचारियों ने सुरक्षित भवन में तत्काल शिफ्टिंग की मांग उठाई।
इनका कहना है-
एआरटी सेंटर में शार्ट सर्किट की घटना को गंभीरता से लेकर उचित कदम उठाए जा रहे हैं। स्टाफ व मरीजों की सुरक्षा प्राथमिकता है। सेंटर के लिए पृथक भवन को लेकर उच्च अधिकारियों से चर्चा कर निर्णय लिया जाएगा।
डा. नवनीत सक्सेना, डीन
नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कालेज अस्पताल
