नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। रीवा में 20 मई को जैन साध्वियों के साथ हुई दर्दनाक सड़क दुर्घटना के विरोध में सोमवार को शहर में जैन समाज का व्यापक आक्रोश दिखा।
विशाल मौन जुलूस और विरोध प्रदर्शन
दिगंबर जैन पंचायत सभा, जैन नवयुवक सभा, अखिल भारतीय महिला परिषद और सकल जैन समाज के संयुक्त तत्वावधान में ‘राष्ट्रीय संत सुरक्षा अभियान’ के अंतर्गत विशाल मौन जुलूस और विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया।

पुरुष कुर्ता-पायजामा और महिलाएं केसरिया वेशभूषा में शामिल
सुबह कमानिया गेट पर बड़ी संख्या में समाजजन एकत्र हुए, जहां पुरुष सफेद कुर्ता-पायजामा और महिलाएं केसरिया वेशभूषा में शामिल हुईं। इसके बाद हजारों लोगों का मौन जुलूस शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए घंटाघर पहुंचा।

घटना को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और अमानवीय बताया
प्रदर्शन में महिलाओं, युवाओं और बच्चों की उल्लेखनीय भागीदारी रही। समाज के लोगों ने रीवा में पैदल विहार कर रही जैन साध्वियों को कार से कुचलने की घटना को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और अमानवीय बताया।

सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी
प्रदर्शनकारियों ने आरोपियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि संतों और साध्वियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। प्रदर्शन के समापन पर समाज के प्रतिनिधियों ने तहसीलदार के माध्यम से प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।

जैन साधु-संत अहिंसा, संयम और शांति का संदेश देते हैं
समाज के प्रबुद्धजनों ने कहा कि जैन साधु-संत अहिंसा, संयम और शांति का संदेश देते हैं तथा जीवनभर पैदल विहार करते हैं। ऐसे तपस्वियों पर लगातार बढ़ते हमले और सड़क हादसे समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि संत सुरक्षित नहीं रहेंगे, तो धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों पर भी संकट गहरा सकता है।
