नईदुनिया प्रतिनिधि, शिवपुरी। शासन-प्रशासन भले ही जिले में खाद का पर्याप्त स्टॉक होने का दावा कर रहा हो, जमीनी हकीकत कुछ और है। शिवपुरी में शनिवार को किसान डीएपी लेने पहुंचे तो उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा। किसानों ने बताया कि शुक्रवार शाम को पोर्टल पर डीएपी के लिए टोकन जारी हुए थे।
टोकन मिलने के बाद शनिवार सुबह बड़ी संख्या में किसान खाद लेने एमपी एग्रो के गोदाम पर पहुंचे, तो वहां मौजूद कर्मचारियों ने यह कहते हुए खाद देने से मना कर दिया कि, उनके गोदाम में डीएपी का स्टॉक ही नहीं है।
भोपाल से भूल से चढ़ गया डीएपी का स्टॉक
जब इस संबंध में एमपी एग्रो के गोदाम पर मौजूद कर्मचारियों से बात की गई तो उनका कहना था कि, यह टोकन भोपाल से पुराने स्टॉक के आधार पर जारी हो गए थे। पोर्टल पर भूलवश डीएपी का स्टॉक चढ़ा हुआ था, जबकि मौके पर गोदाम में डीएपी नहीं, एनपीके उपलब्ध है। इस गड़बड़ी से किसानों को आर्थिक नुकसान के साथ परेशानी भी उठानी पड़ी।
किसान पूरे दिन इंतजार के बाद बैरंग लौटे। खरीफ सीजन की शुरुआत में ही इस तरह ऐप और वास्तविक स्टॉक में अंतर सामने आने से किसानों में नाराजगी है। खाद लेने पहुंचे कई किसान 50 से 60 किमी दूर गांवों से किराया-भाड़ा खर्च कर आए थे।
किसानों ने जताया खाद की कालाबाजारी का संदेह
किसानों का कहना था कि शाम को खाद की बुकिंग हुई थी, ऐप पर पर्याप्त स्टॉक था। सुबह वह यहां पहुंचे तो स्टॉक न होने को भले ही अधिकारी तकनीकी खामी बताकर अपनी गलती छिपाने का प्रयास कर रहे हैं, परंतु जब गोदाम में देखा गया तो एनपीके के कट्टों के साथ डीएपी के दो कट्टे रखे मिले हैं, आखिर यह कट्टे कहां से आ गए।
अगर ऐप पर पुराना स्टॉक बताया जा रहा था तो वह स्टॉक कहां है? ऐसे कई सवालों के साथ किसानों का आरोप है कि कहीं न कहीं अधिकारियों और कर्मचारियों ने सांठगांठ करके रात के अंधेरे में खाद की कालाबाजारी की है। अब इसे तकनीकी खामी का नाम देकर बच रहे हैं।
एनपीके देने से भी किया इंकार
किसानों ने जब मौके से ही इस संबंध में उपसंचालक कृषि से बात की तो उन्होंने किसानों से कहा कि अगर गोदाम पर डीएपी का स्टॉक नहीं है तो वह एनपीके ले लें। कुछ किसान उनकी इस बात पर भी राजी हो गए, उन्होंने गोदाम पर मौजूद कर्मचारियों से एनपीके खाद देने के लिए कहा तो उन्होंने एनपीके खाद देने से ही इंकार कर दिया। खास बात यह रही कि किसानों ने इस संबंध में गोदाम पर मौजूद कर्मचारियों की अधिकारियों से भी बात करवाई, लेकिन इसके बाद भी किसानों को एनपीके खाद भी नहीं दिया गया।
किसान क्यों थे परेशान
- उन्हें जो टोकन जारी हुआ है, वह बिना खाद मिले आज ही समाप्त हो जाएगा।
- शासन के आंकड़ों में तो उन्हें खाद देना माना जाएगा, लेकिन हकीकत में उन्हें खाद मिला ही नहीं है।
- वह करीब 250-250 रुपये का पेट्रोल खत्म करके खाद लेने आए थे, वह उनका नुकसान हो गया।
- खाद लेने के लिए उन्होंने खेत में उग रही सब्जी का काम भी नहीं किया, पूरा दिन खराब हो गया।
- वह खाद ले जाने के लिए जो वाहन किराए पर लेकर आए थे, किसानों का वह पैसा भी खराब हो गया।
- अब उन्हें खाद लेने के लिए दोबारा से टोकन बुक करना पड़ेगा, उसके लिए भी परेशान होना होगा।
किसानों की जुबानी, अव्यवस्था की कहानी
“मैंने कल शाम को अपने दादा कृष्णभान सिंह यादव के नाम पर टोकन बुक किया था, आज जब खाद लेने आया तो यहां कह दिया कि डीएपी स्टॉक में ही नहीं है। इन्होंने खाद की रात ही रात में कालाबाजारी की है, यह तय है।” – कृष्णभान सिंह यादव (उन्नाई, कोलारस)
“मैंने अपने दादाजी गंगाराम धाकड़ के नाम पर टोकन बुक किया है। यहां आया तो कह दिया डीएपी का तो स्टॉक ही नहीं है, जबकि टोकन ऑनलाइन स्टॉक होने पर ही बुक हुआ है। ऐसे में स्टॉक रातों रात कहां चला गया। गोदाम में डीएपी के दो कट्टे रखे हैं, जो दर्शाते हैं रात में यहां कुछ तो गलत हुआ है।” – देवेंद्र यादव (उन्नाई, कोलारस)
“मैंने मेरे पिताजी बलवीर धाकड़ के नाम पर टोकन बुक किया है, यहां जब डीएपी नहीं मिला तो मैं उपसंचालक कृषि के कहे अनुसार एनपीके लेने के लिए तैयार हो गया, परंतु इन्होंने मुझे एनपीके खाद भी यह कहकर देने से मना कर दिया कि आपकी बुकिंग तो डीएपी की है। मुझे न डीएपी दिया गया और न ही एनपीके, सब घालमेल है।” – अपेश यादव (सढ़बूढ़, बदरवास)
इनका कहना है
“हमारे गोदाम में डीएपी है ही नहीं, भोपाल से ऐप पर पुराना स्टॉक चढ़ गया। यह पूरी मिस्टेक भोपाल से हुई है। यह सब कैसे हो गया, मुझे कुछ पता नहीं है।” – विष्णु ओझा (कर्मचारी, एमपी एग्रो)
