प्रमोशन में आरक्षण मामले में हाई कोर्ट की विशेष पीठ के समक्ष सुनवाई हुई। राज्य सरकार ने कहा कि पदोन्नति में आरक्षण पिछड़ेपन और सेवाओं में अपर्याप्त प्…और पढ़ें

HighLights
- MP पदोन्नति में आरक्षण: हाई कोर्ट में राज्य सरकार ने पेश किया जवाब
- पिछड़ेपन व अपर्याप्त प्रतिनिधित्व के डेटा पर दिया जा रहा है आरक्षण
- हाई कोर्ट का निर्देश, याचिकाकर्ताओं से साझा किया जाए कर्मचारियों का डाटा
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। मध्य प्रदेश में प्रमोशन में आरक्षण के बहुचर्चित मामले में मंगलवार को हाई कोर्ट की विशेष पीठ के समक्ष सुनवाई हुई। राज्य सरकार ने जवाब पेश करते हुए कहा कि पदोन्नति में आरक्षण पिछड़ेपन और सेवाओं में अपर्याप्त प्रतिनिधित्व से जुड़े आंकड़ों के आधार पर दिया जा रहा है।
सुनवाई के बाद विशेष पीठ ने राज्य सरकार को संबंधित कर्मचारियों का डाटा याचिकाकर्ताओं के साथ साझा करने के निर्देश दिए तथा उन्हें जवाबी बहस की तैयारी के लिए समय देते हुए अगली सुनवाई 21 जुलाई निर्धारित कर दी।
विशेष पीठ के समक्ष शुरू हुई सुनवाई
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया के स्वयं को मामले से अलग करने के बाद गठित विशेष पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल और न्यायमूर्ति विनय सराफ शामिल हैं, ने मामले की सुनवाई शुरू की। सुनवाई में राज्य सरकार ने अपने पक्ष में विस्तृत जवाब न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया।
डाटा साझा करने के निर्देश
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार अपने दावों के समर्थन में उपलब्ध कर्मचारियों के संबंधित आंकड़े और डेटा याचिकाकर्ताओं को उपलब्ध कराए, ताकि वे उस पर अपना पक्ष रख सकें। इसके बाद याचिकाकर्ताओं को बहस की तैयारी के लिए समय दिया गया।
यह भी पढ़ें- एमपी में 27% OBC आरक्षण पर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला… अब 15 जुलाई से हर दिन दोपहर में होगी डे-टू-डे सुनवाई
- राज्य सरकार ने हाई कोर्ट में जवाब दाखिल किया।
- सरकार ने पिछड़ेपन व प्रतिनिधित्व के आंकड़ों के आधार पर प्रमोशन में आरक्षण का दावा किया।
- हाई कोर्ट ने कर्मचारियों का संबंधित डेटा याचिकाकर्ताओं से साझा करने के निर्देश दिए।
- विशेष पीठ ने अगली सुनवाई 21 जुलाई तय की।
- मामले का असर प्रदेश की पदोन्नति, वरिष्ठता और लाखों शासकीय कर्मचारियों पर पड़ सकता है।
