सेवानिवृत्ति के बाद की गई वसूली कानूनन उचित नहीं है। आदेश निरस्त करते हुए यदि कोई राशि वसूल की गई है तो उसे वापस करने और सभी बकाया भुगतान 90 दिनों में…और पढ़ें

HighLights
- जगदीश प्रसाद दुबे मामले में दिए निर्णय का हवाला
- पेंशनरी लाभ से इस तरह की वसूली नहीं की जा सकती
- 29 जून 2015 और 8 नवंबर 2017 के परिपत्रों का उल्लेख
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह की एकलपीठ ने सेवानिवृत्ति के बाद सेवानिवृत्त निरीक्षक के पेंशनरी लाभ से दो लाख 78 हजार 743 रुपये की वसूली के आदेश कोकानून के विपरीत माना है।
सुप्रीम कोर्ट के रफीक मसीह फैसले का हवाला
भोपाल निवासी याचिकाकर्ता राम स्वरूप शर्मा की ओर से अधिवक्ता सचिन पांडे ने दलील दी कि सेवानिवृत्ति के बाद कर्मचारी के पेंशनरी लाभ से इस तरह की वसूली नहीं की जा सकती। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के रफीक मसीह फैसले तथा हाई कोर्ट की फुल बेंच के जगदीश प्रसाद दुबे मामले में दिए निर्णय का हवाला दिया।
31 दिसंबर 2020 को सेवानिवृत्त हुए थे
साथ ही राज्य शासन के 29 जून 2015 और 8 नवंबर 2017 के परिपत्रों का भी उल्लेख किया गया। हाई कोर्ट ने पाया कि शर्मा 31 दिसंबर 2020 को अधिवार्षिकी आयु पूरी कर सेवानिवृत्त हुए थे।
कार्रवाई सेवानिवृत्ति से एक माह पहले पूरी होनी चाहिए
शासन के निर्देशों के अनुसार पेंशन और ग्रेच्युटी प्रकरण सेवानिवृत्ति से 24 माह पहले अंतिम रूप से तैयार किए जाने हैं तथा वसूली संबंधी कार्रवाई सेवानिवृत्ति से एक माह पहले पूरी होनी चाहिए।
बकाया भुगतान 90 दिनों में करने के निर्देश
कोर्ट ने कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद की गई वसूली कानूनन उचित नहीं है। आदेश निरस्त करते हुए यदि कोई राशि वसूल की गई है तो उसे वापस करने और सभी बकाया भुगतान 90 दिनों में करने के निर्देश दिए।
