भिंड जिले में ‘ई अटेंडेंस’ की सख्ती के कारण सरकारी स्कूलों के शिक्षक बारिश में रबर ट्यूब की मदद से उफनता नाला पार कर ड्यूटी पहुंचने को मजबूर हैं।

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। भिंड जिले के बबेड़ी पंचायत अंतर्गत आने वाले ग्राम नदरौली और सुमेर सिंह का पुरा के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों को हर बारिश में जान जोखिम में डालकर ड्यूटी पर पहुंचना पड़ रहा है। रास्ते में बेसली नदी से जुड़ा बरसाती नाला (खार) पड़ने के कारण गांवों का संपर्क पूरी तरह कट जाता है। इसके बावजूद शिक्षा विभाग की ‘ई अटेंडेंस’ (e Attendance) व्यवस्था की अनिवार्यता के चलते शिक्षकों को उफनते नाले को टायर के ट्यूब की मदद से पार करना पड़ रहा है, ताकि समय पर उपस्थिति दर्ज हो सके।
ई अटेंडेंस की सख्ती से बढ़ी शिक्षकों की परेशानी
शिक्षकों ने बताया कि बारिश के समय नाले में पानी भरने के बाद उसका स्तर नीचे उतरने में 4 से 5 घंटे का समय लगता है। पहले स्थिति देखकर थोड़ी देरी से स्कूल पहुंचने पर काम चल जाता था। लेकिन अब मोबाइल ऐप से ई अटेंडेंस दर्ज करना अनिवार्य होने के कारण समय पर न पहुंचने पर अनुपस्थिति (Absenteeism) दर्ज होने और सैलरी कटने का डर रहता है।
इन सभी दिक्कतों के बाद टीचर्स ने स्कूल आने के लिए सुरक्षित विकल्प की मांग की है। शिक्षकों ने विभागीय अधिकारियों से मांग की है कि बारिश के दौरान स्कूल पहुंचने के लिए सुरक्षित पुल/रास्ते का निर्माण किया जाए या ई अटेंडेंस के नियमों में व्यावहारिक छूट दी जाए।
शिक्षकों ने जताई कड़ी आपत्ती
नदरौली प्राथमिक विद्यालय में राजेश भारती और शिव कुमार उपाध्याय, माध्यमिक विद्यालय में देवेंद्र कुशवाह, महेंद्र भदौरिया और शंभू कुशवाह तथा सुमेर सिंह का पुरा में संतोष गोयल और अशोक बघेल पदस्थ हैं।
इन सभी का कहना है बारिश होते ही खार में पानी बढ़ जाता है जिसे उतरने में समय लगता है। ई अटेंडेंस की अनिवार्यता के कारण मजबूरी में टायर के ट्यूब पर बैठकर जान जोखिम में डालकर उफनते नाले को पार करना पड़ता है।
