बार काउंसिल चुनावों का इतिहास भी बताता है कि कई बार शुरुआती दौर में पीछे चल रहे उम्मीदवार बाद के राउंड में मजबूत स्थिति बना लेते हैं। …और पढ़ें

HighLights
- चुनाव में मुकाबला लंबा, जटिल और बेहद रोचक
- शुरुआती बढ़त अंतिम सफलता की गारंटी नहीं होती
- शुरुआती संकेत दे दिए हैं, लेकिन तस्वीर अभी अधूरी
सुरेन्द्र दुबे, नईदुनिया जबलपुर। मध्य प्रदेश स्टेट बार काउंसिल चुनाव-2026 की मतगणना ने शुरुआती संकेत दे दिए हैं, लेकिन तस्वीर अभी अधूरी है। प्रथम वरीयता मतों की गिनती में अधिवक्ता राकेश सिंह भदौरिया 216 मतों के साथ बढ़त बनाकर उभरे हैं।
27 तहसीलों की गिनती पूरी, 3091 मत वैध
तीसरे दिन तक 27 तहसीलों के 3210 मतपत्रों की जांच पूरी हुई, जिनमें 3091 मत वैध और 119 मत निरस्त पाए गए। भदौरिया के पीछे शैलेन्द्र वर्मा (167), नरेन्द्र कुमार जैन (150), आर.के. सिंह सैनी (142), दिनेश नारायण पाठक (141) और मनीष तिवारी (140) जैसे उम्मीदवार बेहद कम अंतर से बने हुए हैं।
23 सीटों के लिए चल रही बहुस्तरीय जंग
23 सदस्यीय परिषद के गठन के लिए हो रहे इस चुनाव में एकल संक्रमणीय मत प्रणाली लागू है। इस व्यवस्था में उम्मीदवारों की वास्तविक ताकत केवल प्रथम वरीयता मतों से नहीं, बल्कि बाद के दौरों में स्थानांतरित होने वाले मतों से भी तय होती है। यही कारण है कि मतगणना के शुरुआती चरण को लीड तो माना जा सकता है, लेकिन ‘निर्णायक बढ़त’ नहीं।
हर राउंड बदल सकता है तस्वीर
मतगणना के अगले चरणों में कम मत पाने वाले उम्मीदवारों के वोट अन्य दावेदारों को स्थानांतरित होंगे। ऐसे में वर्तमान बढ़त और रैंकिंग में बड़े बदलाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
कानूनी समुदाय की नजर अगले दौर पर
मुख्य चुनाव अधिकारी न्यायमूर्ति एसके पालो व वरिष्ठ अधिवक्ता नमन नागरथ के अनुसार मतगणना प्रक्रिया पारदर्शी ढंग से जारी है तथा इसकी लाइव स्ट्रीमिंग भी की जा रही है। फिलहाल कानूनी समुदाय की निगाहें अगले राउंड पर टिकी हैं।
कई स्थापित नाम ऊपर-नीचे हो सकते
पहले चरण ने भदौरिया को बढ़त का चेहरा जरूर बनाया है, लेकिन चुनाव का गणित अभी खुला हुआ है। वरीयता मतों की अगली परतें खुलते ही कई स्थापित नाम ऊपर-नीचे हो सकते हैं। फिलहाल इतना तय है कि मध्य प्रदेश की सबसे प्रतिष्ठित अधिवक्ता संस्था के चुनाव में मुकाबला लंबा, जटिल और बेहद रोचक होने जा रहा है।
