रानापुर के सराफा कारोबारी विशाल सोनी छुट्टियां मनाने के लिए इंदौर से ट्रेन से नैनीताल के लिए 1 जुलाई को रवाना हुए थे। उनके साथ 22 सदस्य थे। उन्होंने न…और पढ़ें

HighLights
- 20 फीट ऊंचाई से गिरने के कारण उसकी गर्दन की हड्डी टूट गई थी
- नैनीताल, हल्द्वानी और दिल्ली में इलाज के बावजूद डॉक्टर उसे बचा नहीं सके
- सराफा कारोबारी छुट्टियां मनाने इंदौर से ट्रेन से नैनीताल के लिए 1 जुलाई को रवाना हुए थे
नईदुनिया प्रतिनिधि, रानापुर (झाबुआ)। झाबुआ के रानापुर के सराफा कारोबारी के तीन वर्षीय बेटे गौरांश की नैनीताल में होटल की तीसरी मंजिल से गिरने के बाद उपचार के दौरान मौत हो गई। हादसे में उसकी गर्दन की हड्डी टूट गई थी। नैनीताल, हल्द्वानी और दिल्ली में इलाज के बावजूद डॉक्टर उसे बचा नहीं सके।
वह होटल की खिड़की से गिर गया था। 20 फीट ऊंचाई से गिरने के कारण उसकी गर्दन की हड्डी टूट गई थी। उसका दो अस्पतालों में इलाज चला। गंभीर चोट और सांस लेने में आ रही तकलीफ के कारण रविवार रात उसकी मौत हो गई। अब उसके शव को इंदौर से झाबुआ ले जाया गया।
जानकारी के अनुसार के अनुसार रानापुर के सराफा कारोबारी विशाल सोनी छुट्टियां मनाने के लिए इंदौर से ट्रेन से नैनीताल के लिए 1 जुलाई को रवाना हुए थे। उनके साथ 22 सदस्य थे। उन्होंने नैनीताल के मल्लीताल क्षेत्र में एक होटल लिया था। होटल की खिड़की की फर्श से ऊंचाई कम थी। तीन साल का गौरांश खेलते-खेलते खिड़की के पास गया और तीसरी मंजिल से गिर पड़ा।
गौरांश के गिरते ही होटल के कर्मचारी दौड़े और उसे उठाया। वह सिर के बल गिरा था और उसकी गर्दन एक तरफ लटक गई थी। परिजन उसे लेकर नैनीताल के निजी अस्पताल पहुंचे, लेकिन हालत गंभीर देख डाक्टरों ने उसे हल्द्वानी के अस्पताल में रेफर कर दिया। वहां उसका इलाज चला, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं होने पर उसे इलाज के लिए दिल्ली रेफर कर दिया गया। गंभीर चोटों के कारण नहीं बचाई जा सकी जान
बच्चे के गिरने की आवाज सुनकर हड़कंप मच गया। परिजन और होटल स्टाफ उसे तुरंत बीडी पांडे जिला चिकित्सालय ले गए। प्राथमिक उपचार के बाद हालत गंभीर होने पर उसे हल्द्वानी रेफर किया गया।हल्द्वानी में हुई जांच में पता चला कि मासूम के सिर की हड्डी और गर्दन में गंभीर चोटें आई हैं। स्थिति को देखते हुए उसे बेहतर इलाज के लिए दिल्ली के फोर्टिस अस्पताल भेजा गया। परिजनों ने बताया कि दिल्ली ले जाते समय रास्ते में एक बार बच्चे की धड़कन बंद हो गई थी, जिसे डॉक्टरों ने काफी मशक्कत के बाद वापस शुरू किया था। हालांकि, दिल्ली पहुंचने के बाद तमाम प्रयासों के बावजूद मासूम ने दम तोड़ दिया।ओर उसे बचाया नही जा सकता ।
रानापुर में पसरा सन्नाटा, इकलौता पुत्र
गौरांश की मौत की खबर जैसे ही इंटरनेट मीडिया पर फैली, रानापुर और उसके आसपास के इलाकों में शोक की लहर दौड़ गई। दादा अनिल सोनी ने बताया कि परिवार इस हादसे से गहरे सदमे में है। मासूम का पार्थिव शरीर एंबुलेंस द्वारा दिल्ली से रानापुर के लिए लाया गया ।इकलौते पुत्र को खोने के बाद परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। सोमवार को गौरांश का गमगीन माहोल में रानापुर मुक्ति धाम पर अंतिम संस्कार किया गया।
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