गोसंरक्षण के मुद्दे पर भी अपनी बात रखते हुए कहा कि हिंदू समाज लंबे समय से गोमाता को ‘राष्ट्रमाता’ का दर्जा देने की मांग करता रहा है। …और पढ़ें

HighLights
- आस्था के केंद्र नहीं हैं, सनातन संस्कृति की जीवंत धरोहर हैं
- बोर्ड गठित में पीठाधीश्वर एवं अखाड़ा परिषद के शीर्ष संत हों
- गोमाता को ‘राष्ट्रमाता’ घोषित करने के प्रश्न पर भी दोहराया संकल्प
सुरेन्द्र दुबे, नईदुनिया, जबलपुर। धर्मस्थलों की धार्मिक और आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए देश में एक स्वतंत्र ‘सनातन बोर्ड’ के गठन की आवश्यकता बताते हुए द्वारिका शारदा पीठ के स्वामी सदानंद सरस्वती ने एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय विमर्श को स्वर दिया।
कहा कि मंदिरों, तीर्थस्थलों और सनातन परंपरा से जुड़े धार्मिक संस्थानों के संरक्षण, प्रबंधन और मर्यादा की रक्षा के लिए ऐसा बोर्ड गठित किया जाना चाहिए, जिसमें आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित चारों मान्य पीठ के स्वामियों के साथ विभिन्न परंपराओं के पीठाधीश्वर एवं अखाड़ा परिषद के शीर्ष संत शामिल हों।
धर्मसम्मत विधि-निषेध और परंपराओं का पालन सुनिश्चित होना चाहिए
सिविक सेंटर स्थित मां बगलामुखी सिद्ध पीठ में आयोजित कार्यक्रम में ने कहा कि तीर्थ और धर्मक्षेत्र केवल आस्था के केंद्र नहीं हैं, बल्कि सनातन संस्कृति की जीवंत धरोहर हैं। इसलिए वहां धर्मसम्मत विधि-निषेध और परंपराओं का पालन सुनिश्चित होना चाहिए। धार्मिक संस्थानों की स्वायत्तता और सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंतन की आवश्यकता है।
भारतीय सांस्कृतिक चेतना से जुड़ा विषय
अनेक सरकारों और प्रधानमंत्रियों के बदलने के बावजूद यह मांग अब तक पूरी नहीं हो सकी है। उन्होंने कहा कि गोसंरक्षण केवल धार्मिक नहीं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक चेतना से जुड़ा विषय है।
बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया
नगर आगमन पर मां बगलामुखी सिद्ध पीठ में ब्रह्मचारी चैतन्यानंद महाराज ने उनका पादुका पूजन कर स्वागत किया। इसके बाद वे परमहंसी गंगा आश्रम के लिए रवाना हुए। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
