जबलपुर के गोलबाजार स्थित सरकारी भूमि पर अतिक्रमण के आरोपों को लेकर हाई कोर्ट ने कलेक्टर और निगमायुक्त को सख्त निर्देश दिए हैं। …और पढ़ें

HighLights
- पार्षद अयोध्या तिवारी पर कब्जे के आरोप लगे
- 22 जून 2026 तक कार्रवाई पूरी करने का आदेश
- मामले की अगली सुनवाई 25 जून को निर्धारित हुई
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। जबलपुर में सरकारी भूमि पर कथित अतिक्रमण के मामले में हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल और न्यायमूर्ति रत्नेश चंद्र सिंह बिसेन की युगलपीठ ने कलेक्टर और निगमायुक्त जबलपुर को निर्देश दिए हैं कि यदि जांच में भूमि सरकारी पाई जाती है, तो 22 जून 2026 या उससे पहले अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पूरी की जाए।
गोलबाजार की भूमि को लेकर विवाद
मामला गोलबाजार स्थित लगभग 12,800 वर्गफुट भूमि से जुड़ा है। हस्तक्षेपकर्ता अमित जैन की ओर से अधिवक्ता सतीश वर्मा ने अदालत में पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि पुनरीक्षण याचिकाकर्ता जयदीप शाह के घर के सामने स्थित यह भूमि सरकारी है, जिस पर स्थानीय पार्षद अयोध्या तिवारी सहित अन्य लोगों द्वारा अतिक्रमण किए जाने का आरोप है।
अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि इस संबंध में राज्य सरकार और नगर निगम को अभ्यावेदन सौंपा गया था। इसमें सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाने की मांग की गई थी, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई।
तीन दिनों में अभ्यावेदन देने के निर्देश
मामले की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता तीन दिनों के भीतर कलेक्टर और नगर निगम आयुक्त को अभ्यावेदन प्रस्तुत करे। इसके बाद अधिकारी पहले यह तय करेंगे कि संबंधित भूमि वास्तव में सरकारी है या नहीं।
यदि भूमि सरकारी पाई जाती है, तो प्रशासन को 30 दिनों के भीतर अतिक्रमण हटाने के लिए आवश्यक कदम उठाने होंगे। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कार्रवाई 22 जून 2026 तक पूरी कर ली जाए। मामले की अगली सुनवाई 25 जून को निर्धारित की गई है।
राज्य शासन की ओर से शासकीय अधिवक्ता अभिषेक सिंह, नगर निगम की ओर से अधिवक्ता सौरभ सुंदर और याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता प्रियंकुश जैन ने पक्ष रखा।
