नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। शहर में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और उनके हमलों के बीच ग्वालियर के रेबीज फ्री सिटी बनने की राह आसान नहीं है। केंद्र सरकार ने रेबीज फ्री सिटी के लिए नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) जारी की है, जिसमें शहर की कुत्ता आबादी के कम से कम 70 प्रतिशत हिस्से का एंटी-रेबीज टीकाकरण जरूरी किया गया है।
बड़े स्तर पर टीकाकरण की आवश्यकता
इसके अलावा शहर में कुत्तों के काटने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। ऐसे में सिर्फ एबीसी यानी एनिमल बर्थ कंट्रोल के माध्यम से कुत्तों की नसबंदी करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि बड़े स्तर पर एंटी-रेबीज टीकाकरण और उसकी नियमित निगरानी भी करनी होगी।
शहर में आवारा कुत्तों की संख्या नियंत्रित करने के लिए फिलहाल बिरला नगर और लक्ष्मीगंज स्थित एबीसी सेंटरों में ही औसतन 35 कुत्तों की नसबंदी का काम हो रहा है यानी शहर की पूरी कुत्ता आबादी के मुकाबले नसबंदी अभियान का दायरा अभी सीमित है।
केंद्र सरकार भी आवारा कुत्तों की आबादी नियंत्रित करने में एबीसी कार्यक्रम को प्रमुख माध्यम मानती है, लेकिन इसके प्रभावी क्रियान्वयन में स्थानीय स्तर की चुनौतियां बनी हुई हैं। ग्वालियर में स्थिति यह है कि नसबंदी के साथ कुत्तों के टीकाकरण को भी बड़े पैमाने पर करने की जरूरत है।
यदि 70 प्रतिशत कुत्तों का टीकाकरण ही रेबीज फ्री सिटी की प्राथमिक शर्त है, तो नगर निगम को पहले शहर में आवारा कुत्तों की वास्तविक संख्या का आकलन कर उसके अनुपात में टीकाकरण का लक्ष्य तय करना होगा।
सार्वजनिक स्थानों पर भी चुनौती
रेबीज फ्री सिटी के लिए केवल टीकाकरण और नसबंदी ही नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्थानों को कुत्ता मुक्त करने और जरूरत के अनुसार आश्रय स्थल विकसित करने पर भी जोर है। ग्वालियर में पिपरोली स्थित ग्वाला नगर के पास आश्रय स्थल का निर्माण भी शुरू नहीं हो पा रहा है।
ऐसे में कुत्तों को पकड़ने, उनकी नसबंदी व टीकाकरण कराने और फिर निर्धारित स्थानों पर रखने की पूरी व्यवस्था तैयार करना नगर निगम के सामने बड़ी चुनौती है।
केंद्र सरकार की राष्ट्रीय रेबीज नियंत्रण पहल में कुत्तों की आबादी के प्रबंधन के साथ एंटी-रेबीज वैक्सीन की उपलब्धता और स्थानीय निकायों के स्तर पर एबीसी गतिविधियों को मजबूत करने पर जोर दिया गया है।
हर रोज 50 से अधिक डॉग बाइट के मामले
शहर में इलाज कराने के दौरान तीन माह के अंदर सात लोगों की मौत हुई थी, लेकिन इनमें से चार बाहरी जिलों के थे, जो ग्वालियर में इलाज कराने आए थे।
वहीं, जिले की बात की जाए तो यहां इसी वर्ष राक्सी पुल निवासी 36 वर्षीय राजू कुशवाह, मुरार निवासी गोलू और एक अन्य महिला किरण की मौत हो गई।
शहर में हर रोज डॉग बाइट के 50 से अधिक मामले सामने आ रहे हैं। हालांकि, जयारोग्य अस्पताल और जिला अस्पताल में हर दिन 100 से अधिक एंटी रेबीज वैक्सीन लोगों को लग रही हैं, लेकिन इनमें ताजा मामले 35 से 50 के बीच रहते हैं।
