भागीरथपुरा के जलस्रोत्र मई 2026 तक दूषित पानी उगल रहे थे। 15 मई 2026 को 24 जलस्रोतों से सैंपल लिए गए थे। इनमें से 18 सैंपल दूषित थे। इन जलस्रोतों का प…और पढ़ें

HighLights
- पोस्टमार्टम रिपोर्ट ही आयोग के सामने नहीं आई
- मई में भी दूषित था भागीरथपुरा के जलस्रोतों का पानी
- 24 जलस्रोतों से सैंपल लिए गए थे, इनमें से 18 सैंपल दूषित थे
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर : भागीरथपुरा के जलस्रोत्र मई 2026 तक दूषित पानी उगल रहे थे। 15 मई 2026 को 24 जलस्रोतों से सैंपल लिए गए थे। इनमें से 18 सैंपल दूषित थे। इन जलस्रोतों का पानी पीने के योग्य तो दूर रोजमर्रा के कामकाज के लायक तक नहीं था।
जांच आयोग ने भी माना कि दूषित पानी की वजह से भागीरथपुरा में 24 मौत हुई थी, लेकिन इनमें से कितने शवों का पोस्टमार्टम हुआ था, यह भी स्पष्ट नहीं है। एक डाक्टर का कहना है कि सिर्फ दो शवों का पोस्टरमार्टम हुआ था जबकि दूसरे डाक्टर यह संख्या चार बता रहे हैं। आयोग के सामने पोस्टमार्टम रिपोर्ट तक प्रस्तुत नहीं की गई।
यह जानकारी भागीरथपुरा दूषित पानी कांड को लेकर हाई कोर्ट में प्रस्तुत एक सदस्यीय जांच आयोग की जांच रिपोर्ट के अवलोकन में सामने आई है। दूषित पानी कांड को लेकर आधा दर्जन जनहित याचिकाएं हाई कोर्ट में चल रही हैं। इन याचिकाओं से जुड़े अधिवक्ता इन दिनों रजिस्ट्रार कार्यालय में इस रिपोर्ट का अवलोकन कर नोट बना रहे हैं। बुधवार को भी कुछ वकील रिपोर्ट का अवलोकन करने पहुंचे।
सीधे जिम्मेदार माना अधिकारियों को
रिपोर्ट में महापौर परिषद सदस्यों को भले ही आयोग ने क्लिनचीट दे दी, लेकिन नगर निगम के कुछ जिम्मेदारों को घटना के लिए सीधे-सीधे जिम्मेदार ठहराया है। आयोग ने जांच में माना है कि तकनीकी और आर्थिक प्रक्रिया, समय पर कार्रवाई सुनिश्चित करने और गैर जिम्मेदाराना निगरानी के लिए प्रथमदृष्टत: एक्जीक्यूटीव इंजीनियर संजीव कुमार श्रीवास्तव जिम्मेदार हैं। इसके अलावा भी कुछ और अधिकारियों को अधिकारियों को जिम्मेदार माना है।
