रायसेन साइकिल वितरण अनियमितता मामले में कोर्ट ने डीजी से व्यक्तिगत हलफनामा मांगा, पूछा 5 साल तक लंबित रखने वाले अधिकारी कौन।

HighLights
- याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया EOW अधिकारियों की अवैध मांगें पूरी न होने से देरी हुई
- कोर्ट ने पूछा 5 साल से ज्यादा मामला लंबित रखने वाले अधिकारी कौन और क्या कार्रवाई हुई
- कोर्ट ने कहा देरी जांच अधिकारी की भूमिका पर सवाल और भ्रष्टाचार की आशंका
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। रायसेन जिले की वर्ष 2013 की साइकिल वितरण योजना से जुड़े कथित अनियमितता मामले में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ, ईओडब्ल्यू की कार्यप्रणाली पर हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने सवाल किया कि जब दो दिसंबर, 2021 को अभियोजन की मंजूरी मिल चुकी थी, तो वर्ष 2026 तक आरोप पत्र दाखिल क्यों नहीं किया गया।
न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल व न्यायमूर्ति अवनीन्द्र कुमार सिंह की युगलपीठ ने ईओडब्ल्यू के महानिदेशक से व्यक्तिगत हलफनामा मांगा है। मामले में बरेली तहसील की सहायक शिक्षक सीमा धाकड़ और उमराव धाकड़ ने ईओडब्ल्यू की ओर से दर्ज प्राथमिकी को चुनौती दी है। याचिकाकर्ताओं के अनुसार वर्ष 2013 में छात्रों को साइकिल वितरण के लिए उनके खातों में राशि आई थी। संबंधित प्राचार्य ने राशि निकालकर लाभार्थियों को नकद दे दी थी। बाद में ईओडब्ल्यू ने जांच शुरू की।
सुनवाई में बताया गया कि अन्य सह-आरोपियों का विचारण आठ अगस्त, 2023 को समाप्त हो चुका है। वहीं याचिकाकर्ताओं के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी दो दिसंबर, 2021 को मिल गई थी। इसके बावजूद वर्ष 2026 तक आरोप पत्र दाखिल नहीं हुआ। कोर्ट ने कहा कि इतनी लंबी देरी प्रथमदृष्टया जांच अधिकारी और संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाती है व भ्रष्टाचार की आशंका पैदा करती है।
अधिक समय तक लंबित रखने वाले अधिकारी कौन हैं
याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि ईओडब्ल्यू अधिकारियों की कथित अवैध मांगें पूरी नहीं होने के कारण आरोप पत्र दाखिल करने में देरी हुई। कोर्ट ने आरोपों को सिद्ध नहीं माना है, लेकिन महानिदेशक से पूरे मामले का स्पष्टीकरण मांगा है। महानिदेशक को बताना होगा कि पांच साल से अधिक समय तक मामला लंबित रखने वाले अधिकारी कौन हैं और उनके खिलाफ क्या कार्रवाई प्रस्तावित की गई है।
