इटारसी से भोपाल के बीच चलने वाली ट्रेनों में यात्रियों को एक अलग तरह की परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यात्रियों का आरोप है कि कुछ किन्नर समूह बनाक …और पढ़ें

HighLights
- इटारसी-भोपाल रूट पर पर किन्नरों का खौफ
- यात्रियों से कर रहे अवैध वसूली, कहां है रेलवे सुरक्षा
- पुष्पक और कुशीनगर एक्सप्रेस में अधिक शिकायतें
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। इटारसी से भोपाल के बीच चलने वाली ट्रेनों में यात्रियों को एक अलग तरह की परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यात्रियों का आरोप है कि कुछ किन्नर समूह बनाकर ट्रेनों के कोचों में प्रवेश करते हैं और यात्रियों से पैसे मांगते हैं।
कई बार पैसे देने से इनकार करने पर बहस और अभद्रता जैसी स्थिति भी बन जाती है। इससे खासकर महिला, बुजुर्ग और परिवार के साथ यात्रा करने वाले यात्री असहज महसूस करते हैं। रोजाना सफर करने वाले यात्रियों का कहना है कि यह समस्या अब आम होती जा रही है और इस पर प्रभावी कार्रवाई की जरूरत है।
पुष्पक और कुशीनगर एक्सप्रेस में अधिक शिकायतें
दैनिक यात्रियों के अनुसार मेमू, पैसेंजर और कुछ एक्सप्रेस ट्रेनों में इस तरह की शिकायतें ज्यादा मिल रही हैं। विशेष रूप से सुबह चलने वाली पुष्पक एक्सप्रेस और दोपहर में आने वाली कुशीनगर एक्सप्रेस में ऐसे मामले अधिक बताए जा रहे हैं। इन ट्रेनों में बड़ी संख्या में श्रमिक वर्ग और दैनिक यात्री सफर करते हैं। यात्रियों का कहना है कि कई लोग विवाद से बचने के लिए मजबूरी में पैसे दे देते हैं, जिससे इस तरह की गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है।
आउटर पर उतरने से कार्रवाई में आती है दिक्कत
यात्रियों के मुताबिक संबंधित समूह अक्सर इटारसी से ट्रेनों में सवार होते हैं और भोपाल स्टेशन पहुंचने से पहले आउटर पर ट्रेन की रफ्तार कम होने पर उतर जाते हैं। यही वजह है कि स्टेशन परिसर में उनकी पहचान और गिरफ्तारी मुश्किल हो जाती है। यात्रियों का सवाल है कि जब ट्रेनों में आरपीएफ और जीआरपी की व्यवस्था मौजूद है, तब भी ऐसी गतिविधियां कैसे जारी हैं। उनका मानना है कि नियमित गश्त और निगरानी बढ़ाकर इस समस्या पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है।
जवाबदेही से बचते नजर आए आरपीएफ अधिकारी
मामले में पक्ष जानने के लिए आरपीएफ कमांडेंट डा. अभिषेक से फोन और संदेश के माध्यम से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। इसके अलावा संबंधित रिपोर्टर के मोबाइल नंबर को कॉल एवं व्हाट्सएप पर ब्लॉक कर दिया गया। ऐसे में मामले को लेकर उनका पक्ष प्राप्त नहीं हो सका। अधिकारियों द्वारा मीडिया के सवालों पर प्रतिक्रिया न देना और संवाद के माध्यमों को अवरुद्ध करना पारदर्शिता एवं जवाबदेही के दृष्टिकोण से उचित नहीं माना जा सकता।
