नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर : इंदौर अब सिर्फ कारोबार, शिक्षा और रोजगार का शहर नहीं रहा। साइबर ठगों के नेटवर्क में भी शहर की मौजूदगी तेजी से दिखाई दे रही है। देश के साइबर क्राइम हाटस्पाट से जुड़े आंकड़ों में इंदौर चार अलग-अलग श्रेणियों में टाप-15 में शामिल है। कहीं ठगी के लिए फर्जी सिम एक्टिवेट हो रही हैं तो कहीं म्यूल अकाउंट में रकम पहुंच रही है। एटीएम और चेक के जरिए साइबर ठगी की रकम निकालने के नेटवर्क में भी इंदौर का नाम प्रमुख शहरों में है।
आंकड़ों के मुताबिक, साइबर ठगी में इस्तेमाल होने वाली संदिग्ध सिम के पीओएस लोकेशन में इंदौर आठवें स्थान पर है। यानी शहर से ऐसे सिम एक्टिवेट होने की संख्या चिंताजनक है, जिनका इस्तेमाल साइबर अपराध में किया जा रहा है। इससे पहले भी पुलिस की कार्रवाई में सामने आ चुका है कि मोबाइल दुकानों और सिम एजेंटों के माध्यम से दूसरे लोगों के दस्तावेजों पर सिम एक्टिवेट कर उन्हें साइबर ठगों तक पहुंचाया जा रहा है।
म्यूल अकाउंट का बड़ा अड्डा
साइबर ठगी की रकम को इधर-उधर करने के लिए इस्तेमाल होने वाले मनी म्यूल अकाउंट की श्रेणी में इंदौर अर्बन 12वें स्थान पर है। यानी ठगों के लिए शहर में ऐसे बैंक खाते उपलब्ध हैं, जिनमें ठगी की रकम जमा कर उसे दूसरे खातों या माध्यमों में ट्रांसफर किया जा सके।
हाल की पुलिस कार्रवाई भी आंकड़ों की तस्वीर को मजबूत करती है। एरोड्रम पुलिस ने सोमवार को म्यूल अकाउंट नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई में 16 आरोपितों को पकड़ा है। एक खाते में ही एक महीने के दौरान 3.42 करोड़ रुपये का संदिग्ध ट्रांजेक्शन मिला था और उससे देशभर की 200 से ज्यादा साइबर फ्राड शिकायतें जुड़ी थीं। इसी तरह क्राइम ब्रांच की कार्रवाई में ऐसे बैंक खाते सामने आए हैं, जिनसे कई राज्यों में हुई ठगी की रकम का कनेक्शन मिला।
चेक से रकम निकालने में पांचवें नंबर पर
इंदौर का नाम साइबर ठगी की रकम की चेक से निकासी वाले हाटस्पाट में पांचवें स्थान पर है। आंकड़ों में कोलकाता पहले, मलप्पुरम दूसरे, कोझिकोड तीसरे और जयपुर चौथे स्थान पर है। इसके बाद इंदौर का नंबर आता है। यह बताता है कि ठगी के बाद रकम को बैंकिंग चैनल से निकालने के लिए भी शहर का इस्तेमाल हो रहा है।
एटीएम निकासी में भी इंदौर 12वें स्थान पर है। यानी साइबर ठगी का पैसा सिर्फ ऑनलाइन ट्रांसफर होकर दूसरे शहरों में नहीं जा रहा, बल्कि शहर में बैंकिंग माध्यमों के जरिए इसकी निकासी की कड़ी भी मौजूद है।
निवेश से लेकर डिजिटल ठगी तक पूरा बाजार
इंदौर में साइबर अपराध का नेटवर्क किसी एक तरह की ठगी तक सीमित नहीं है। फर्जी ट्रेडिंग एप से निवेश के नाम पर ठगी, फर्जी सिम, म्यूल बैंक अकाउंट, आनलाइन वित्तीय फ्राड, साइबर ठगी की रकम की निकासी और रकम को आगे ट्रांसफर करने जैसे अलग-अलग तरीके सामने आ रहे हैं।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि इन मामलों में इंदौर के आरोपितों के तार दूसरे राज्यों से जुड़ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर बैठकर तैयार किए गए बैंक खाते, सिम और मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल देश के अलग-अलग हिस्सों में बैठे लोगों को ठगने के लिए किया जा रहा है। यानी ठगी का शिकार कहीं और का व्यक्ति है और उसके पीछे बैठा नेटवर्क इंदौर में हो सकता है।
शहर का कोई हिस्सा अछूता नहीं
पुलिस की लगातार कार्रवाई से यह भी सामने आ रहा है कि साइबर अपराध का नेटवर्क शहर के किसी एक इलाके तक सीमित नहीं है। अलग-अलग थाना क्षेत्रों से म्यूल अकाउंट, फर्जी सिम और आनलाइन ठगी से जुड़े आरोपित पकड़े जा चुके हैं। छोटे स्तर पर बैंक खाते और सिम उपलब्ध कराने वालों से लेकर बड़े साइबर सिंडिकेट तक इसकी कड़ियां जुड़ रही हैं।
