Indore Ki Kachori: इंदौर के जायकों में अब लहसुन की कचौड़ी ने भी अपनी खास जगह बना ली है।

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। जायके के सफर पर निकले स्वाद के शौकीनों की गाड़ियां इंदौर की गलियों में अक्सर वहां आकर रुकती हैं जहां परंपरा के साथ नवाचार का भी तालमेल समाया हो। व्यंजनों की लंबी फेहरिस्त में से कभी आज के दौर के पकवानों पर निगाह आकर रुकती है तो कभी पारंपरिक व्यंजन की महक और स्वाद यह तलाश पूरी करती है।
स्वाद के खजाने को अपने में समेटे शहर के पाककला विशेषज्ञों ने व्यंजनों में कई स्वादिष्ट बदलाव किए और सबसे ज्यादा बदलाव तो कचौड़ी के स्वाद में हुए। कहीं हरे चने की कचौड़ी बनी तो कहीं आलू की, कहीं भुट्टे की कचौड़ी ने लोगों को अपना मुरीद बनाया तो कहीं प्याज की कचौड़ी ने। मटर, मूंगदाल और निमाड़ी कचौड़ी भी इस शहर में खूब खाई-खिलाई जाती है। ऐसा ही एक और स्वाद लहसुन के रूप में शामिल हुआ।
चाचा-भतीजे की जोड़ी ने बनाई कचौड़ी
शहर में करीब 30 साल पहले लहसुन की कचौड़ी अपने अस्तित्व में आई और आज यह स्वाद के शौकीनों को अपना दीवाना बना चुकी है। हम बात कर रहे हैं उस लहसुन की कचौड़ी की जिसे चाचा-भतीजे की जोड़ी ने बनाया। मुकेश राठौर और लोकेश राठौर जब 20 वर्ष तक पोहा, मूंगदाल की कचौड़ी और समोसा खिलाते रहे तो इन्हें लगा कि कुछ नया स्वाद भी ग्राहकों को देना चाहिए। इन्होंने लहसुन की कचौड़ी के रूप में प्रयोग किया।
परिवार और दोस्तों को इसे चखाया। स्वाद की कसौटी पर यह कचौड़ी उत्तीर्ण हुई और इस तरह इसका कारोबार शुरू हो गया। बियाबानी स्थित गायत्री उपहार गृह 50 साल से संचालित हो रहा है। संचालक लोकेश बताते हैं कि कुछ नया स्वाद ग्राहकों को देने के लिए यह प्रयोग किया। लहसुन को पीसकर उसे भुने हुए बेसन में मिलाया जाता है।
मसाले की मात्रा पर बहुत ध्यान देना होता है
इस बेसन में गरम मसाला, लाल मिर्च, हरी मिर्च, धनिया पाउडर, हल्दी, साबुत धनिया, धनिया पत्ती और नमक डालकर मसाले को भूना जाता है। इस भरावन को मैदे की पूड़ी बनाकर उसमें भरकर तला जाता है। इसमें गरम मसाला डालते वक्त उसकी मात्रा पर बहुत ध्यान देना पड़ता है। गरम मसाले की मात्रा या महक उतनी ही होना चाहिए कि वह लहसुन के स्वाद और महक पर हावी न हो।
कचौड़ी 12 घंटे तक खराब नहीं होती
इसलिए गरम मसाला घर पर ही तैयार किया जाता है और उन्हीं खड़े मसालों को डालते हैं जिनकी महक संतुलित रहे। इस कचौड़ी को परोसते वक्त उसमें हरी और लाल चटनी डाली जाती है। हरी चटनी में भी लहसुन होती है ताकि कचौड़ी के बाहरी आवरण में भी लहसुन का स्वाद आए। ग्राहकों की मांग पर इसके साथ बारीक कटा प्याज डालकर भी दिया जाता है। यह कचौड़ी 12 घंटे तक भी खराब नहीं होती। यूं तो इसकी मांग वर्षभर रहती है पर बरसात और सर्दी में यह सबसे ज्यादा खाई जाती है।
