नई दिल्ली के जनकपुरी हाट में 5 जुलाई को आयोजित मैंगो फेस्टिवल-2026 में कट्ठीवाड़ा के नूरजहां आम को बिगेस्ट मैंगो 2026 अवार्ड से सम्मानित किया गया। यह …और पढ़ें

HighLights
- विश्वप्रसिद्ध नूरजहां आम एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाने में सफल रहा
- विशाल आकार, विशिष्ट स्वाद और दुर्लभता के कारण नूरजहां आम देशभर में पहले से ही प्रसिद्ध है
- दिल्ली में आयोजित इस प्रतिष्ठित आयोजन में इसे देखने और जानने के लिए आम प्रेमियों की भारी भीड़ उमड़ी
नईदुनिया न्यूज, कट्ठीवाड़ा (आलीराजपुर)। आदिवासी अंचल कट्ठीवाड़ा की पहचान बन चुका विश्वप्रसिद्ध नूरजहां आम एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाने में सफल रहा।
नई दिल्ली के जनकपुरी हाट में 5 जुलाई को आयोजित मैंगो फेस्टिवल-2026 में कट्ठीवाड़ा के नूरजहां आम को “बिगेस्ट मैंगो 2026 अवार्ड” से सम्मानित किया गया। यह सम्मान कट्ठीवाड़ा ही नहीं, बल्कि पूरे अालीराजपुर जिले और मध्यप्रदेश के लिए गर्व का विषय है। अपने विशाल आकार, विशिष्ट स्वाद और दुर्लभता के कारण नूरजहां आम देशभर में पहले से ही प्रसिद्ध है। दिल्ली में आयोजित इस प्रतिष्ठित आयोजन में इसे देखने और जानने के लिए आम प्रेमियों की भारी भीड़ उमड़ी।
बावड़ी फार्म हाउस के भरत राज सिंह जादव ने बताया कि मैंगो फेस्टिवल में नूरजहां के साथ कट्ठीवाड़ा की दो अन्य विशेष आम की किस्में शंखनाद (नारियला) और तिरंगा भी प्रदर्शित की गई थीं। इन दोनों किस्मों ने भी अपनी अनूठी विशेषताओं के कारण दर्शकों और आम प्रेमियों का खूब ध्यान आकर्षित किया तथा पूरे आयोजन में विशेष आकर्षण का केंद्र बनी रहीं।
कट्ठीवाड़ा की जलवायु और प्राकृतिक वातावरण में तैयार होने वाली ये दुर्लभ आम की किस्में क्षेत्र की समृद्ध कृषि विरासत का प्रतीक हैं। राष्ट्रीय स्तर पर मिली इस उपलब्धि से क्षेत्र के किसानों और आम उत्पादकों में उत्साह का माहौल है तथा भविष्य में इन विशिष्ट किस्मों की पहचान देश-विदेश तक और मजबूत होने की उम्मीद जताई जा रही है।
नूरजहां का इतिहास
भरतसिंह जाधव ने बताया कि नूरजहां आम का इतिहास बेहद दिलचस्प है। यह प्रजाति मूल रूप से अफगान क्षेत्र की है। स्वर्गीय रणवीरसिंह जादव वर्ष 1970 के आसपास गुजरात से इस आम की कलम लेकर आए थे। उन्होंने कट्ठीवाड़ा स्थित अपने फार्म में इसे रोपा। यहां वर्षों की कड़ी मेहनत से संरक्षित किया। यह पौधा पूरे आलीराजपुर जिले की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान बन चुका है।साथ ही हमारी आय का स्त्रोत भी बन गया है।
उन्होंने बताया कि जलवायु और मिट्टी के विशेष प्रभाव के कारण नूरजहां के पेड़ों की संख्या बढ़ रही है। फल के लिए विशेष जलवायु और मिट्टी अनुकूल साबित हुई। इसके चलते नूरजहां विशालकाय आकार में ढल सका, जिसके लिए यह दुनियाभर में प्रसिद्ध है। आम के आकार और स्वाद को लेकर इसे 1999 और 2010 में राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित भी किया जा चुका है।प्रसिद्ध गायिका नूरजहां के नाम पर इसका नाम रखा गया है।
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