आयोग ने तहसीलदार से यह जानकारी भी मांगी है कि आयोग की पूर्व अनुमति के बावजूद इंजन और जनरेटर सहित अन्य अवशेष अब तक सुरक्षित स्थान पर क्यों नहीं पहुंचाए…और पढ़ें

HighLights
- मंच ने आरोप लगाया कि जांच शुरू होने से पहले ही क्रूज डिस्मेंटल कर दिया गया।
- उसकी फिटनेस और तकनीकी क्षमता का समुचित परीक्षण संभव नहीं हो सका।
- जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाना चाहिए।
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। बरगी क्रूज दुर्घटना की जांच में साक्ष्यों के संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए जांच आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति संजय द्विवेदी ने दुर्घटनाग्रस्त क्रूज के इंजन, जनरेटर और अन्य अवशेषों को तत्काल सुरक्षित स्थान पर रखने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने तहसीलदार को यह सुनिश्चित करने को भी कहा है कि पहले दी गई अनुमति के बावजूद अवशेष अब तक सुरक्षित क्यों नहीं किए गए।
दरअसल, बरगी क्रूज दुर्घटना की जांच के बीच साक्ष्य सुरक्षित रखने को लेकर जांच आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति संजय द्विवेदी ने बुधवार को निर्देश जारी कर दुर्घटनाग्रस्त क्रूज के इंजन, जनरेटर तथा अन्य अवशेषों को सुरक्षित स्थान पर रखवाने और उनकी सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने को कहा है। इस संबंध में अधीनस्थ तहसीलदार को कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
आयोग ने तहसीलदार से यह जानकारी भी मांगी है कि आयोग की पूर्व अनुमति के बावजूद इंजन और जनरेटर सहित अन्य अवशेष अब तक सुरक्षित स्थान पर क्यों नहीं पहुंचाए गए। साथ ही सभी शेष साक्ष्यों को तत्काल संरक्षित करने के निर्देश दोहराए गए हैं।
सुनवाई के दौरान नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शन मंच ने आयोग के समक्ष प्रतिवेदन प्रस्तुत कर आशंका जताई कि बरगी बांध का जलस्तर बढ़ने पर दुर्घटनास्थल पर बचे महत्वपूर्ण साक्ष्य जलमग्न हो सकते हैं, जिससे दुर्घटना की वास्तविक वजहों का पता लगाने में कठिनाई आएगी।
मंच ने यह भी आरोप लगाया कि जांच शुरू होने से पहले ही क्रूज को डिस्मेंटल कर दिया गया, जिससे उसकी फिटनेस और तकनीकी क्षमता का समुचित परीक्षण संभव नहीं हो सका।
प्रतिवेदन में कहा गया कि यह साक्ष्यों से छेड़छाड़ का गंभीर मामला है तथा जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाना चाहिए।आयोग ने मंच के प्रतिवेदन को रिकार्ड पर लेते हुए साक्ष्यों के संरक्षण को लेकर तत्काल कार्रवाई के संकेत दिए हैं।
