कोर्ट ने टिप्पणी की कि उच्च तकनीकी डिग्री रखने वाले कर्मचारी के लिए यह योग्यता हासिल करना और भी सहज होना चाहिए था, लेकिन उसने निर्धारित अवधि तथा अतिरि…और पढ़ें

HighLights
- बीई (कंप्यूटर साइंस) की डिग्री भी नहीं आई काम
- अनिवार्य योग्यता तय समय में हासिल करना जिम्मेदारी
- कंप्यूटर साइंस में बीई होने के कारण अलग श्रेणी में मानें
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। सरकारी नौकरी में सहानुभूति अवसर दे सकती है, लेकिन नियमों से छूट नहीं। हाई कोर्ट ने इस सिद्धांत को दोहराते हुए अनुकंपा नियुक्त सहायक ग्रेड-थ्री कर्मचारी की रिट अपील निरस्त कर दी।
इस अनिवार्यता से मुक्त नहीं कर सकती
कोर्ट ने कहा कि नियुक्ति आदेश की शर्तों के अनुरूप निर्धारित समय में सीपीसीटी उत्तीर्ण नहीं करने पर सेवा समाप्ति पूरी तरह वैध है। कंप्यूटर साइंस में बीई की डिग्री भी कर्मचारी को इस अनिवार्यता से मुक्त नहीं कर सकती।
सेवा नियमों का विकल्प नहीं
दरअसल, सरकारी सेवाओं में योग्यता संबंधी शर्तों को सर्वोपरि मानते हुए हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अनुकंपा नियुक्ति संवेदना का विषय हो सकती है, लेकिन सेवा नियमों का विकल्प नहीं।
समयसीमा के भीतर अर्जित करना प्रत्येक कर्मचारी का दायित्व
प्रशासनिक न्यायमूर्ति आनंद पाठक व न्यायमूर्ति बीपी शर्मा की युगलपीठ ने सहायक ग्रेड- थ्री के पद पर कार्यरत अमित सिंह बघेल की रिट अपील निरस्त करते हुए कहा कि नियुक्ति आदेश में निर्धारित अनिवार्य योग्यता समयसीमा के भीतर अर्जित करना प्रत्येक कर्मचारी का दायित्व है।
सीपीसीटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य था
कोर्ट ने पाया कि नियुक्ति आदेश में टाइपिंग एवं कंप्यूटर संबंधी योग्यता का स्पष्ट उल्लेख था। वर्ष 2014 के बाद टाइपिंग परीक्षा के स्थान पर सीपीसीटी लागू हो चुका था, इसलिए अपीलकर्ता के लिए सीपीसीटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य था।
अतिरिक्त अवसर के बावजूद इसे प्राप्त नहीं किया
यह तर्क भी स्वीकार नहीं किया गया कि वह कंप्यूटर साइंस में बीई होने के कारण अलग श्रेणी में माना जाए। कोर्ट ने टिप्पणी की कि उच्च तकनीकी डिग्री रखने वाले कर्मचारी के लिए यह योग्यता हासिल करना और भी सहज होना चाहिए था, लेकिन उसने निर्धारित अवधि तथा अतिरिक्त अवसर के बावजूद इसे प्राप्त नहीं किया।
राज्य शासन को यह स्वतंत्रता दी
कोर्ट ने सेवा समाप्ति को वैध ठहराते हुए अपील निरस्त कर दी। हालांकि मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए राज्य शासन को यह स्वतंत्रता दी कि यदि उचित समझे तो कर्मचारी को चतुर्थ श्रेणी के पद पर नियुक्ति के संबंध में विचार कर सकता है।
