नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। इस स्वतंत्रता दिवस पर जब देश भर में तिरंगा लहराएगा, तो उसमें ग्वालियर के कारीगरों के हुनर की चमक साफ दिखाई देगी। दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले से लेकर देश के 18 अलग-अलग राज्यों और रक्षा बलों के ठिकानों तक इस बार ग्वालियर में निर्मित राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाएगा।
देश में सरकारी मानकों के अनुरूप खादी का तिरंगा बनाने का अधिकृत लाइसेंस केवल दो ही स्थानों को प्राप्त है, जिसमें पूरे उत्तर भारत में ग्वालियर स्थित ‘मध्य भारत खादी संघ’ एकमात्र केंद्र है। इस वर्ष 196 हुनरमंद कारीगरों ने दिन-रात परिश्रम करके ये ध्वज तैयार किए हैं, जिन्हें 20 से 25 स्तरों की कड़ी गुणवत्ता जांच के उपरांत ही आपूर्ति के लिए भेजा गया है।
हुब्बल्ली के बाद ग्वालियर को अधिकार
स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्वों पर फहराए जाने वाले आधिकारिक तिरंगों की आपूर्ति में ग्वालियर का महत्वपूर्ण योगदान है। भारत में ISI मार्क वाले प्रामाणिक खादी तिरंगे बनाने का अधिकार महज दो संस्थाओं के पास है पहला कर्नाटक का हुब्बल्ली केंद्र और दूसरा ग्वालियर का मध्य भारत खादी संघ।
ग्वालियर में तैयार तिरंगे मध्य प्रदेश के अतिरिक्त दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार, छत्तीसगढ़, गुजरात तथा दक्षिण भारत के अनेक राज्यों में भेजे जाते हैं।
1925 में ‘चरखा संघ’ से हुई थी ऐतिहासिक शुरुआत
ग्वालियर की इस प्रतिष्ठित संस्था की जड़ें काफी पुरानी हैं। वर्ष 1925 में इसकी शुरुआत ‘चरखा संघ’ के रूप में की गई थी। शुरुआती दौर में यहां सालाना केवल 10 से 12 हजार ध्वज ही तैयार हो पाते थे। हालांकि, समय के साथ मांग में भारी इजाफा हुआ और अब हर साल 20 से 30 हजार तिरंगे निर्मित किए जाते हैं। इस वर्ष संस्था ने ₹70 लाख से अधिक मूल्य के तिरंगों की आपूर्ति की है, जो बीते वर्ष की तुलना में लगभग 25 प्रतिशत अधिक है।
5-6 दिनों की कठिन प्रक्रिया और कड़े मानक
ग्वालियर में एक मानक तिरंगा तैयार करने में 5 से 6 दिनों का समय लगता है। धागा कातने से लेकर कपड़े की बुनाई, रंगाई और अंतिम सिलाई तक का समस्त कार्य कारीगर हस्तनिर्मित पद्धतियों से पूरा करते हैं।
कपड़ा तैयार होने के पश्चात तीनों रंगों के सटीक अनुपात, सिलाई की मजबूती और माप की अत्यंत बारीकी से पड़ताल की जाती है। लगभग 20 से 25 कड़े गुणवत्ता पैमानों पर खरा उतरने के बाद ही ध्वज पर ISI की मुहर लगाई जाती है।
VIP गाड़ियों के छोटे झंडे से लेकर 6×4 फीट के विशाल तिरंगे
संस्था द्वारा कुल 9 से 10 अलग-अलग आकारों में राष्ट्रीय ध्वज तैयार किए जाते हैं। इनमें सबसे अधिक मांग 2×3 फीट तथा 6×4 फीट आकार वाले तिरंगों की होती है। इसके अलावा मंत्रियों, प्रशासनिक अधिकारियों तथा संवैधानिक पदों पर आसीन महानुभावों के वाहनों पर लगाए जाने वाले विशेष छोटे आकार के झंडे भी यहीं निर्मित होते हैं। कड़े गुणवत्ता नियमों के कारण उत्पादन में काफी समय लगता है, फिर भी यहां के कारीगर राष्ट्रध्वज की गरिमा बनाए रखते हुए आपूर्ति पूरी करने में निरंतर जुटे रहते हैं।
